लखनऊ के डालीगंज स्टेशन पर रविवार को सुबह उस वक्त बड़ा हादसा होने से तब टल गया जब रुहेलखंड एक्सप्रेस और गोंडा पैसेंजर ट्रेन आमने-सामने भिड़ने से बची।
इससे स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। स्टेशन और खड़ी रुहेलखंड एक्सप्रेस के यात्रियों में भगदड़ मच गई। रुहेलखंड एक्सप्रेस ट्रेन के यात्री तो कोच से कूदकर भागने लगे।
इसके कारण स्टेशन पर डेढ़ घंटे तक हंगामा होता रहा। लखनऊ पूर्वोत्तर मंडल के रेल प्रबंधक (डीआरएम)टीम सहित मौके पर पहुंचे और तब जांच शुरू कराई और दो पायलट सहित पांच कर्मियों को निलंबित किया, जिसमें तीन लोको इंसेक्टर शामिल हैं।
सुबह आठ बजे ऐशबाग से कासगंज के बीच चलने वाली रुहेलखंड एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15310) सुबह डालीगंज स्टेशन के फ्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी थी।
रुहेलखंड एक्सप्रेस के छूटने का सिग्नल ऑन हो चुका था कि उसी वक्त पर सीतापुर की तरफ से पैसेंजर ट्रेन (ऐशबाग और गोंडा के बीच वाया मैलानी होकर चलने वाली ट्रेन नंबर 52249) करीब 40 किमी की स्पीड से दौड़ती हुई आ गई।
स्टेशन के यात्रियों ने जब खड़ी रुहेलखंड एक्सप्रेस वाली पटरी पर पैसेंजर ट्रेन को आते देखा तो दौड़ते हुए चिल्लाना शुरू कर दिया।
शोर खराबे और यात्रियों के भगदड़ से स्टेशन अधीक्षक अरुण सेन गुप्ता एवं अन्य कर्मचारी लाल झंडी लेकर भागे और पैसेंजर ट्रेन के पायलट को दिखाकर खतरे का एहसास कराया तब इमरजेंसी ब्रेक लगाकर पैसेंजर ट्रेन को बामुश्किल 107 मीटर पहले रोका गया।
पैसेंजर ट्रेन के पायलट अरविंद सिंह ने बाद में ट्रेन को बैक किया और प्लेटफॉर्म नंबर एक के बगल अतिरिक्त पटरी पर लाकर खड़ा कर दी। पैसेंजर ट्रेन के रुकते ही उसके यात्रियों में भगदड़ मच गई।
घटना की सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंची तो डीआरएम अनूप कुमार अन्य अधिकारियों और आरपीएफ के साथ मौके पर पहुंचे और स्टेशन के कंट्रोल रूम से लेकर घटना स्थल तक जांच शुरू कराई।
इसके कारण रुहेलखंड एक्सप्रेस करीब डेढ़ घंटे तक स्टेशन पर खड़ी रही जो सुबह 9:40 बजे सीतापुर की तरफ रवाना हुई। लेकिन पैसेंजर ट्रेन के पायलट अरविंद सिंह, सुरेश कुमार मलिक को अधिकारियों ने हिरासत में लेकर पूछतांछ शुरू की।
दूसरे पायलट मनोज आर्या को बुलाया और पूर्वाह्न 11 बजे डालीगंज स्टेशन से पैसेंजर ट्रेन को लेकर ऐशबाग की तरफ रवाना कराया। इस ट्रेन में कुछ ही यात्री थे जिनको ऐशबाग जाना था। जबकि अन्य दूसरी सेंचुरी एक्सप्रेस से जा चुके थे।
पायलट के खून का लिए नमूने
डीआरएम को आशंका हुई कही शराब पीकर ट्रेन का संचालन करने के कारण पायलट ने ऑन सिग्नल को नजरअंदाज नहीं किया।
इसकी जांच के लिए चिकित्सकों की टीम स्टेशन बुलाई और पायलट अरविंद सिंह एवं सहायक पायलट सुरेश कुमार मलिक के खून के नमूने लेने के निर्देश दिए।
चिकित्सकों ने स्टेशन पर ही खून के नमूने लेकर स्टेशन के कंट्रोल रूम में उसकी जांच की। लेकिन इस जांच में एल्कोहल की पुष्टि हुई या नहीं इसका पता नहीं चल सका।
‘जे’ ग्रेड लेबल की जांच शुरू
डीआरएम एवं उसकी टीम की फौरी जांच में पैसेंजर ट्रेन के पायलट अरविंद सिंह, सुरेश कुमार मलिक एवं तीन लोको इंसपेक्टरों की लापरवाही मानी जा रही है।
डालीगंज स्टेशन पर जानकारी देते हुए सीनियर परिचालन प्रबंधक स्वदेश कुमार सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में पाया गया कि पैसेंजर ट्रेन के पायलट ने रुहेलखंड एक्सप्रेस के ऑन सिग्नल को नजरअंदाज किया है।
पायलट के द्वारा सतर्कता बरती जाती तो उसी ट्रैक पर पैसेंजर ट्रेन नहीं आती जिस पर पहले से ही रुहेलखंड एक्सप्रेस खड़ी थी जिसका पायलट गार्ड की हरी झंडी का इंतजार कर रहा था।
उन्होंने बताया कि इस आरोप में पायलट अरविंद सिंह, सहायक पायलट सुरेश कुमार मलिक, लोको इंसेक्टर पीके गुप्ता, एसबी सिंह, अगमनाथ को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने बताया कि इस प्रकरण की ‘जे’ ग्रेड लेबल की उच्च स्तरीय चार समिति जांच करेगी। यह समिति हफ्ते भर में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। निलंबित कर्मियों की लापरवाही उजागर हुई तो सबको नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा।
कैसे काम करता सिग्नल
लखनऊ मंडल रेल प्रबंधक अनूप कुमार के मुताबिक सिग्नल सिस्टम ऑटोमैटिक है। इंटरलाकिंग पैनल पर ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। पैनल पर रूट एवं सिग्नल बटन होते हैं।
उन्होंने बताया कि जिस ट्रैक पर ट्रेन को लेना होता है तो पैनल पर रूट एवं सिग्नल के बटन को दबा दिया जाता है। इसके बाद ट्रेन उस ट्रैक पर आकर खड़ी हो जाती है।
लेकिन ट्रेन को थ्रू पास देना होता तो अगले एवं पिछले स्टेशन मास्टर से बातचीत करने के बाद एडवांस स्टार्टर को लोवर कर देते जिससे लाइन क्लीयर हो जाती है। इसके बाद ट्रेन बिना रुके ही गुजर जाती है।
क्यों तोड़ा सिग्नल
रुहेलखंड एक्सप्रेस जिस ट्रैक पर पहले से खड़ी थी तो गोंडा-ऐशबाग पैसेंजर ने सिग्नल को क्यों तोड़ा। इस सवाल का जवाब देते हुए डीआरएम ने कहा कि सिग्नल सिस्टम ऑटोमैटिक है, जिसके तहत जिस ट्रैक पर पहले से कोई ट्रेन खड़ी है तो दूसरी ट्रेन का सिग्नल क्लीयर नहीं हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक जांच में ड्राइवर के द्वारा सिग्नल को ओवर शूट किया गया। इसके कारण क्या हैं इसके लिए जांच समिति ने सभी कंप्यूटर डाटा को लेकर जांच कर रही है। दूसरी तरफ सूत्रों की माने तो रिले सिस्टम की गड़बड़ी के चलते इंटरलाकिंग फेल होने से पैनल पैड लॉक हो गया।