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हजरतगंज चौराहे से गुजरने वालों के लिए अच्छी खबर

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हजरतगंज चौराहा पर मंगलवार दोपहर से ट्रैफिक सिग्नल नई टाइमिंग के मुताबिक काम करने लगे। अब गंज चौराहे पर 80 सेकंड से ज्यादा नहीं रुकना होगा।
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एएसपी ट्रैफिक हबीबुल हसन ने बताया कि विधानसभा भवन से अशोक मार्ग, अलका तिराहा, राजभवन और सिविल अस्पताल की तरफ जाने वाले ट्रैफिक लोड का अध्ययन करने के बाद सिग्नल में नई टाइमिंग फीड की गई है। रात करीब आठ बजे तक ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम के अफसरों ने नई टाइमिंग का परीक्षण किया।

एएसपी ट्रैफिक ने बताया कि हजरतगंज चौराहा पर ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित करने में सबसे बड़ी बाधा ट्रैफिक सिग्नल ही थे। यह सिग्नल लंबे समय से या तो बंद पड़े थे या फिर ट्रैफिक लोड के मुताबिक, काम नहीं कर रहे थे।
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सिग्नल का संचालन व रखरखाव करने वाले नगर निगम के अफसरों से बातचीत के बाद इन्हें दुरुस्त कराया गया। इसके बाद हजरतगंज के सभी रूट पर ट्रैफिक लोड की स्टडी कराई गई। इसके बाद सिग्नल में नई टाइमिंग फीड की गई।

मंगलवार दोपहर सिग्नल चालू करके नई टाइमिंग का परीक्षण भी किया गया। एएसपी ट्रैफिक ने बताया कि अभी ट्रैफिक लोड की स्टडी के मुताबिक तय की गई नई टाइमिंग का परीक्षण चल रहा है। अगर समस्या आती है तो टाइमिंग में बदलाव किया जाएगा।
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यह होगी रेड लाइट की नई टाइमिंग

•विधानसभा भवन और अशोक मार्ग आने-जाने वाले वाहनों के बीच 80 सेकंड

•अलका तिराहा से राजभवन की तरफ आने-जाने वाले वाहनों के लिए 60 सेकंड

•विधानसभा भवन से सिविल अस्पताल की तरफ जाने वाले वाहनों के लिए 40 सेकंड

तीन मिनट से ज्यादा का स्टॉपेज पैदा करता है झुंझलाहट

एएसपी ट्रैफिक ने बताया कि सिग्नल की टाइमिंग ऐसी होनी चाहिए कि किसी भी रूट पर वाहन चालकों को तीन मिनट से ज्यादा न रुकना पड़े। एक सर्वे के मुताबिक, ट्रैफिक सिग्नल पर तीन मिनट से ज्यादा का स्टॉपेज लोगों में झुंझलाहट पैदा करता है।

नई टाइमिंग से ट्रैफिक संचालन में सुधार देखने को मिला

नई टाइमिंग से हजरतगंज चौराहा पर ट्रैफिक संचालन में काफी सुधार देखने को मिला। सुबह से शाम तक सबसे ज्यादा लोड विधानसभा भवन और अशोक मार्ग वाले रूट पर रहता है, लेकिन शाम छह से आठ बजे तक सभी पांचों सड़क पर वाहनों की लाइन लग जाती है।

इसे नियंत्रित करने के लिए सिग्नल के साथ ही ट्रैफिक पुलिस की टीम को भी सतर्क रखा गया था। हालांकि, परीक्षण के दौरान शाम को ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को हाथ से इशारा करके ट्रैफिक चलाने की जरूरत महसूस नहीं हुई। वाहन चालक सिग्नल की लाइट और टाइमिंग देखकर खुद ही आते-जाते रहे।

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