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सीतापुर: भाजपा को गढ़ तो सपा के सामने अस्तित्व की चुनौती, 2017 में जीती थीं जिले की सात सीटें

Wed, 26 Jan 2022 01:07 PM IST
ishwar ashish अनुपम सिंह, अमर उजाला, सीतापुर

सार

सीतापुर में सात सीटों पर भगवा फहराने वाली भाजपा के सामने 2017 का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है। महमूदाबाद सीट जीतकर सपा ने जिले में पार्टी की साख बचाई थी। सपा के सामने इस बार भी चुनौतियां हैं।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सीतापुर जिले में सियासी तासीर लगातार गरमाती जा रही है। चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे सियासत चरम पर पहुंच रही है। राजनीतिक घटनाक्रम मौसम की तरह रंग बदल रहा है। दिन गुजरने के साथ सीटों पर समीकरण भी बन और बिगड़ रहे हैं। इन सबके बीच सीटों पर प्रत्याशियों को उतारने की चल रही कवायद के बीच चुनावी रण और रोमांचक हो गया है। हर सीट पर भाजपा और सपा के बीच कड़े मुकाबले के आसार नजर आ रहे हैं। ऐसे में इस बार भाजपा के सामने 2017 का प्रदर्शन दोहराकर गढ़ बचाने तो एक सीट से पार्टी की साख बचाने वाली सपा के सामने अस्तित्व बचाने की बड़ी चुनौती है।

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अब इस चुनावी दंगल में कौन गढ़ और कौन अस्तित्व बचा पाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। 2017 में हुए विधानसभा के चुनाव में मोदी लहर में भाजपा ने जिले की सात सीटों पर भगवा फहराया था। सदर, महोली, हरगांव, बिसवां, सेवता, मिश्रिख, लहरपुर में कमल खिला था, जबकि महमूदाबाद में साइकिल दौड़ी थी। सिधौली में हाथी चिंघाड़ा था। लंबे समय बाद भाजपा ने जिले में शानदार प्रदर्शन किया था। वहीं, मोदी लहर के बावजूद नरेंद्र वर्मा महमूदाबाद सीट पर विजय पताका फहराकर पार्टी की साख बचाने का काम किया था, लेकिन पांच साल बाद हो रहे 2022 के चुनाव में इस बार हालात बदले-बदले नजर आ रहे हैं।

इस बार भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर के आसार नजर आ रहे हैं। दिन पर दिन राजनीतिक गतिविधियां रंग बदल रहीं हैं। सीटों पर प्रत्याशियों को उतारने के बाद भी समीकरण और बन और बिगड़ रहे हैं। प्रत्याशियों के नाम के साथ ही सियासी माहौल में बदलाव की बयार दिखने लगती है। सदर विधानसभा की बात करें तो 2017 में राकेश राठौर विधायक बने थे, जबकि चार बार के विधायक रहे राधेश्याम जायसवाल चुनाव हार गए थे। राकेश राठौर भाजपा छोड़कर सपा में जा चुके हैं। वह टिकट के लिए प्रयासरत थे, लेकिन पार्टी ने राधेश्याम जायसवाल को टिकट देकर जीत का भरोसा जताया है। ऐसे में भाजपा के सामने अब जिताऊ प्रत्याशी उतारकर सीट पर कब्जा करने की चुनौती जरूर है। यह पार्टी भी समझ रही है। यही वजह है कि अभी तक भाजपा प्रत्याशी नहीं घोषित कर सकी है।
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हरगांव विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो इस बार भाजपा ने विधायक सुरेश राही, सपा ने तीन बार के विधायक रहे रामहेत भारती को टिकट दिया है। ऐसे में यहां भी दोनों प्रत्याशियों के बीच कड़े मुकाबले के आसार हैं। लहरपुर में सुनील वर्मा को भाजपा ने टिकट दिया है, जबकि सपा ने अभी पूरी तरह से पत्ते नहीं खोले हैं।

इस सीटों पर इन्हें दिया गया टिकट

बिसवां में सपा ने पूर्व प्रत्याशी अफजाल कौसर को टिकट दिया है। भाजपा ने अभी तक टिकट फाइनल नहीं किया है। महमूदाबाद में भाजपा और सपा दोनों ने पुराने चेहरों पर दांव लगाया है। यहां भी इस बार दोनों प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है। सेवता विधानसभा क्षेत्र की बात करें सपा ने चार बार के विधायक रहे महेंद्र सिंह झीन बाबू को टिकट दिया है।

महेंद्र सिंह 1996, 2002, 2007, 2012 में लगातार विधायक रहे हैं। 2017 में उन्हें टिकट नहीं मिला था। सपा यहां से हार गई थी। भाजपा से ज्ञान तिवारी विधायक बने थे। इस बार भाजपा ने ज्ञान तिवारी और सपा ने महेंद्र सिंह को टिकट दिया है। ऐसे में यहां भी कड़ी टक्कर के आसार हैं।

मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने विधायक रामकृष्ण भार्गव को टिकट दिया है। सपा से टिकट को लेकर कयासों का दौर जारी है। पूर्व राज्यमंत्री के बेटे का नाम चल रहा है, लेकिन अभी तक मुहर नहीं लगी है। सियासी पंडितों की माने तो सीटों पर प्रत्याशियों को उतारने के बाद जो सियासी समीकरण बन रहे हैं, उससे इस बार भाजपा को 2017 का प्रदर्शन दोहरा कर गढ़ बचाने और सपा को अस्तित्व बचाने की चुनौती है। अब इस चुनावी दंगल में फाइनल परिणाम 10 मार्च को आएंगे, इसके बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।
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सिधौली सीट को लेकर नहीं खोल रहे पत्ते

सिधौली विधानसभा सीट को लेकर भी पार्टियां असमंजस में है। अभी तक न तो भाजपा और न ही सपा यहां से प्रत्याशी का नाम फाइनल कर सकी है। 2017 में बसपा के टिकट से जीतने वाले हरगोविंद भार्गव सपा में है। मनीष रावत भी सपा में हैं। ऐसे में सपा किस पर दांव लगाती है। यह देखना दिलचस्प होगा। भाजपा के पूर्व प्रत्याशी रामबख्श रावत ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव से पहले सपा का दामन थामने के बाद अब फिर पुराने घर लौट आएं हैं।

सपा ने मिश्रिख से मनोज राजवंशी और लहरपुर से अनिल वर्मा को दिया टिकट
सपा ने मंगलवार को मिश्रिख से मनोज राजवंशी और लहरपुर से अनिल वर्मा को टिकट दे दिया है। मनोज राजवंशी, पूर्व मंत्री रामपाल राजवंशी के बेटे हैं। मंगलवार को रामपाल राजवंशी ने सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। टिकट को लेकर सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव ने पुष्टि की है।
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