प्लास्टिक के थैले में सामान देने वाले दुकानदारों को हर महीने चार हजार रुपये (48 हजार रुपये सालाना) नगर निकायों में जमा कराना होगा। यही नहीं, प्लास्टिक के थैले में सामान देने के लिए निकायों में पंजीकरण भी कराना होगा। प्लास्टिक जनित प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने इसी तरह के कई और प्रावधान लागू करने का फैसला किया है।
कचरा प्रबंधन के लिए अब तक जारी कई फरमानों के बावजूद नगर निकाय प्रदेश में प्लास्टिक के थैले के प्रयोग को रोकने में फेल ही साबित हुए हैं। इसलिए सरकार ने प्रमुख सचिव नगर विकास की अध्यक्षता में 17 सदस्यीय ‘राज्य स्तरीय सलाहकार समिति’ का गठन किया है। इसे प्लास्टिक की थैली के प्रयोग के लिए नियम बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
समिति की पिछले दिनों हुई बैठक में सदस्यों ने इसके लिए कई सुझाव दिए। इनके आधार पर अध्यक्ष व प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने निदेशक स्थानीय निकाय को प्लास्टिक के कैरीबैग बनाने वाली इकाइयों की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही समिति की बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा लागू किए गए ‘अपशिष्ट प्लास्टिक नियम-2016’ के कुछ प्रावधानों को लागू करने का भी निर्णय लिया गया है।
दुकानदारों को देना होगा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन शुल्क
पॉलीथिन
- फोटो : डेमो
अपशिष्ट प्लास्टिक नियम-15 के तहत जो भी दुकानदार कैरीबैग में सामान देना चाहते हैं, उन्हें नगर निकाय में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। संबंधित निकाय द्वारा पंजीकृत दुकानदारों से 4000 रुपये प्रतिमाह की दर से न्यूनतम 48 हजार रुपये सालाना प्लास्टिक प्रबंधन शुल्क लिया जाएगा।
निकायों को प्लास्टिक कैरीबैग के उत्पादन व बिक्री की क्षमता को देखते हुए शुल्क बढ़ाने की भी छूट होगी। दुकानदार प्लास्टिक बैग देने के एवज में भुगतान ले सकता है, लेकिन उसे अपनी दुकान पर इसका बोर्ड लगाना होगा।
समिति ने ये सुझाव भी दिए
पॉलीथिन
- फोटो : डेमो
- प्लास्टिक के कैरीबैग के उपयोग व उत्पादन के लिए पंजीकृत दुकानदार व आपूर्तिकर्ता ही होंगे पात्र।
- वसूली गई रकम का उपयोग प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली पर ही होगा।
- प्लास्टिक जनित कूड़े का सीमेंट बनाने में उपयोग का भी कंपनियों से हो करार।
- गुजरात समेत अन्य प्रदेशों से प्लास्टिक मंगाने पर रोक के लिए वाणिज्यकर विभाग से हो बात।
- सोशल, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक करने का चले अभियान।
- कैरीबैग के प्रयोग पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए थोक विक्रेताओं पर लगे प्रतिबंध।
- प्रदेश में प्लास्टिक बैग के उत्पादन पर भी लगाया जा सकता है प्रतिबंध।