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तीन मासूमों को ट्रैक्टर-ट्रॉली ने रौंदा, दो की दर्दनाक मौत

Sun, 11 Sep 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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दुर्घटना के बाद बिलखते परिजन - फोटो : amar ujala
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काकोरी में शनिवार दोपहर साइकिल से समोसा लेने जा रहे शोगित (9), उसके भाई शिवा (6) और मौसेरे भाई रवि (4) को सामने से आ रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली ने टक्कर मार दी।
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बुरी तरह से घायल तीनों भाइयों को राहगीर की मदद से ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान शिवा और रवि की मौत हो गई। ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक वाहन छोड़कर मौके से भाग गया। गुस्साए लोगों ने हंगामा-प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया।

दर्दनाक हादसा दोपहर करीब 12 बजे शाहपुर भमरौली रेलवे क्रॉसिंग के पास मुर्दापुर गांव जाने वाली सड़क पर हुआ। एसओ ने बताया कि मलिहाबाद के मक्काखेड़ा निवासी राजाराम और भिम्माखेड़ा में रहने वाले रमेश साढ़ू हैं।
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दोनों परिवार सहित भमरौली के मुर्दापुर गांव स्थित ससुराल में ही रहकर मजदूरी करते हैं। रमेश के परिवार में पत्नी अनीता, बेटी शिवानी, बेटा शोगित और शिवा तथा राजाराम के परिवार में पत्नी सुनीता, बेटा रवि और अंकुर थे।

हादसे से मच गई चीख-पुकार

शनिवार दोपहर शोगित साइकिल से शिवा और रवि को लेकर समोसे लेने गया था। लौटते वक्त सामने से आ रहे गांव के ही राजकुमार की ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उसकी साइकिल में टक्कर मार दी। तीनों उछलकर काफी दूर गिरे। ट्रैक्टर-ट्रॉली गांव का ही कुंदन चला रहा था। वह गांव की कुछ महिलाओं को लेकर किसी काम से निकला था। हादसे से चीख-पुकार मच गई। कुंदन मौके से भाग निकला।

राहगीरों की मदद से तीनों बच्चों को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां रवि और शिवा की मौत हो गई। एसओ रामनरेश यादव ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त करके कुंदन की तलाश की जा रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि कुंदन के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं है। ट्रैक्टर-ट्रॉली राजकुमार की है और वही इसे चलाता है। शनिवार को वह किसी काम में व्यस्त था, इसलिए कुंदन को ट्रैक्टर-ट्रॉली सौंप दी।

बाल-बाल बचे शोगित ने बताया कि वह साइकिल से सड़क किनारे चल रहा था, तभी सामने से तेज गति से ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखी। उसने साइकिल किनारे की लेकिन, ट्रैक्टर-ट्रॉली बेकाबू होकर उसी की तरफ आ गई और टक्कर मार दी।
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शव घर ले जाने के लिए जेब में नहीं थी फूटी कौड़ी

राजाराम और रमेश की आर्थिक स्थिति खराब है। हालत यह थी कि ट्रॉमा से लाडलों का शव घर ले जाने के लिए जेब में फूटी कौड़ी तक नहीं थी। ऐसे में गांव वालों ने उनकी मदद की। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों बच्चों का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।

शिवा गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, लेकिन मजदूरी करने वाला पिता फीस नहीं चुका पा रहा था। बीते वर्ष उसे स्कूल से हटा लिया गया। फिलहाल वह गांव के ही एक युवक के घर पर पढ़ने जाता था। उधर, मुर्दापुर गांव में शनिवार शाम किसी घर में चूल्हा नहीं जला।

खेलते-खेलते निकल गए समोसा लेने
शोगित ने बताया कि दोपहर में तीनों भाई खेल रहे थे तभी भूख लग आई। तीनों शोगित के घर गए लेकिन, वहां खाने को कुछ नहीं था। खोजबीन के दौरान शोगित को 50 रुपये का एक नोट मिल गया।

शोगित ने बताया कि नोट लेकर उसने साइकिल उठाई और दोनों भाइयों को बैठाकर रेलवे क्रॉसिंग के पास कुछ खाने के लिए चला गया। यहां गरम-गरम समोसे बनते देखे तो तीनों ने समोसे लेकर घर पर खाने का फैसला किया। तीनों समोसे लेकर घर की तरफ चले कि हादसा हो गया।
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