पीड़िता ने 18 फरवरी 2017 को लखनऊ के गौतम पल्ली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अनुसार खनन का कार्य दिलाने के लिए दोषियों ने महिला को लखनऊ बुलाया। कई जगहों पर उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में उसकी नाबालिग बेटी से भी अश्लील हरकतें की गईं।
कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता की मां के आचरण पर उठाए सवाल
विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि वैसे तो सामूहिक दुष्कर्म के अपराध में दोषी पर लगाए जाने वाले अर्थदंड की धनराशि को चिकित्सीय खर्चे और पुनर्वास के लिए पीड़िता को भुगतान किए जाने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में पीड़िता (मां)/ वादिनी का आचरण सुनवाई के दौरान ऐसा नहीं रहा है कि उसे किसी प्रकार के जुर्माने या प्रतिकर का भुगतान किया जाए।
जहां तक द्वितीय पीड़िता और वादिनी की नाबालिग (बेटी)का प्रश्न है, उसने भी अभियोजन को सहयोग नहीं किया और वह भी पक्षद्रोही हुई है, लेकिन माना जा सकता है कि उसने उपरोक्त कृत्य अपनी मां के दबाव में किया है। इसका उल्लेख निर्णय में भी किया गया है। इस मामले में नाबालिग वास्तव में पीड़ित है, जिसको पुनर्वास की आवश्यकता है। लिहाजा अर्थदंड की सारी धनराशि 6 लाख रुपये का भुगतान उसे ही किया जाएगा। कोर्ट ने अपने आदेश के अनुपालन के लिए निर्णय की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट लखनऊ को भेज दी है।