आशुतोष पांडेय ने बताया कि इस एप से जुलूस, धरना-प्रदर्शन, कार्यक्रम की अनुमति, पोस्टमार्ट रिपोर्ट और फिल्म शूटिंग की अनुमति दी जाती है। पुलिस द्वारा सत्यापन के लिए भी इस एप पर आवेदन किया जा सकता है।अनुमति मिलने का समय भी निश्चित है।
पिछले पांच महीने में 1067 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें सबसे अधिक 437 चोरी की और दूसरे नंबर पर 362 मामले साइबर क्राइम के हैं। लूट के भी 69 मामले दर्ज किए गए हैं।
जानकारों का कहना है कि पुलिस महकमा इसका जानबूझकर प्रचार-प्रसार नहीं कर रहा है, क्योंकि इस व्यवस्था के बेहतर होने से थानों में रिपोर्ट दर्ज करने के नाम पर होने वाली अवैध कमाई पूरी तरह से बंद हो जाएगी और दूसरा मुकदमा दर्ज होने से संबंधित थाने के अपराध का आंकड़ा बढ़ जाएगा।
आशुतोष पांडेय ने बताया कि 20 जून को देश भर की जन उपयोगी एप का कंपटीशन दिल्ली में होगा। इसमें विजेता रहने वाले जनपयोगी एप को 16 से 20 जुलाई के बीच लखनऊ में ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट के दौरान पुरस्कृत किया जाएगा।
खासियत
नामजद न होने वाले चोरी व लूट के मामले एप पर दर्ज करा सकते हैं। साइबर फ्रॉड के मामलों में तीन दिन में एफआईआर दर्ज होने पर बैंक को खाताधारक को रकम वापस करनी होती है। लगभग 62 मामलों में पुलिस रकम वापस कराई है। यह रकम 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक की है।