एग्रीमेंट अनुबंध की जांच की गई तो सामने आया कि 2 करोड़ 16 लाख में वर्ष 2017 में 92 लाख पेशगी देकर जमीन का एग्रीमेंट किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि जमीन का मूल्य 2017 के उस दौर का था, जब अयोध्या में 6 दिसंबर हो या रामनवमी समेत पड़ने वाले 6 प्रमुख त्योहार और मेले संगीनों के साए में होते थे। इन मौकों पर भी दुकानदार कमाई के लिए तरस जाते थे। तब संशय, डर और दहशत में लोगों के दिन कटते थे।
श्री राम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप सियासी लाभ लेने वाला है, इसका सच्चाई से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। ट्रस्ट ने जो जमीन ली है, उसकी मार्केट वैल्यू मौके पर आकर विरोधी जांच कर लें तो मुंह पर ताला लग जाएगा। ट्रस्ट ईमानदारी से अयोध्या के सांस्कृतिक विकास में लगा हुआ है। जमीन खरीद-फरोख्त कारोबार से जुड़े इकबाल बताते हैं कि जिस भूखंड को ट्रस्ट ने लिया है वह कभी हाजी फैक की हुआ करती थी, उनको कोई औलाद नहीं थी तो वक्फ बोर्ड को देने का निर्णय लिया गया। बाद में जो बोर्ड में प्रभावी थे, उन्होंने इसे प्राप्त करके तमाम लोगों को बेचना शुरू किया।
उन्हीं से हरीश पाठक ने बहुत सस्ते दाम पर खुद व पत्नी के नाम कई जमीन खरीदी थीं, इसके एक हिस्से में कई लोगों के एग्रीमेंट के बाद 2017 का एग्रीमेंट चल रहा था। हालांकि 3 साल में यह भी नियमानुसार समाप्त हो जाना चाहिए था। डेवलपर्स कंपनी चलाने वाले राजेश वर्मा कहते हैं कि बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, राजस्थान समेत तमाम प्रदेशों से आ रहे व्यापारियों को यह इलाका सबसे ज्यादा पसंद आ रहा है। ट्रस्ट आज अपनी जमीन बेचे तो उसे दोगुना दाम मिल सकता है।
मामले पर जिलाधिकारी अयोध्या अनुज कुमार झा का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बाग बिजैसी मोहल्ले में जो जमीन खरीदी है वह काफी महत्वपूर्ण स्थान पर है। ठीक इसी के सामने अयोध्या रेलवे स्टेशन का मुख्य द्वार बनना है। नए प्लान में यह इलाका सबसे बड़ा व्यावसायिक हब बनेगा। भक्तों की सुविधाओं के लिए ट्रस्ट के प्लान का स्वागत होना चाहिए। राम मंदिर की भव्यता और विस्तार में धन की कमी आड़े नहीं आएगी।