निकाय चुनाव के जरिए भाजपा ने आधी आबादी के साथ पिछड़ों को साधने का प्रयास किया है। सामाजिक समीकरण साधने के लिए अनारक्षित वर्ग की सीटों पर भी पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी उतारे हैं। पालिका और नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद पर 45 फीसदी तक महिलाओं को मौका दिया गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2022 विधानसभा चुनाव तक में भाजपा को मिली जीत में पिछड़े वर्ग की बड़ी भूमिका रही है। निकाय आरक्षण विवाद के मद्देनजर पार्टी ने पिछड़े वर्ग में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए तय रणनीति के तहत पालिका व पंचायत अध्यक्षों से लेकर सभासद में अनारक्षित वर्ग की सीटों पर भी पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को मौका दिया है। अवध क्षेत्र में ही बलरामपुर, श्रावस्ती, सीतापुर, उन्नाव और लखीमपुर में सामान्य वर्ग की सीटों पर पिछड़े वर्ग से गुप्ता, साहू, जायसवाल, लोधी, कुर्मी, समाज के प्रत्याशियों को टिकट दिए गए हैं।
आधी आबादी को मिली पूरी भागीदारी
पार्टी के घोषित 99 नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों में 43 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया गया है। अनारक्षित सीटों पर भी महिलाओं को मौका दिया गया है। अवध क्षेत्र में 28 में से 13, पश्चिम क्षेत्र में 33 में से 12, गोरखपुर क्षेत्र में 6 में से 3, कानपुर क्षेत्र में 12 में से 5, काशी क्षेत्र में 10 में से 5 और ब्रज क्षेत्र में 10 में से पांच पालिकाओं में अध्यक्ष पद पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है। नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर भी बड़ी संख्या में महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है। हालांकि नगर निगमों के घोषित दस प्रत्याशियों में महिलाओं के लिए आरक्षित तीन सीटों पर ही टिकट दिया गया है। पार्टी ने मुस्लिम प्रत्याशियों पर भी विश्वास जताया है। तीन पालिकाओं में अध्यक्ष पद पर मुस्लिमों को टिकट दिया गया है। अवध, पश्चिम सहित अन्य क्षेत्रों में नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर भी मुस्लिम प्रत्याशी उतारे गए हैं।