बहराइच जिले में 18वीं विधानसभा के गठन को लेकर चुनावी माहौल गर्म है, लेकिन इस चुनावी माहौल में जिले की राजनीति में कभी अपनी अलग हैसियत रखने वाले दिग्गज चुप्पी साधे हुए हैं। एक समय था कि उनके साथ समर्थकों की भीड़ जुटी रहती थी, आज उन्हीं में से कुछ निजी कारणों से तो कुछ अस्वस्थ होने के चलते चुनावी माहौल से किनारा किए हैं।
जनपद के मतदाताओं ने कांग्रेस, सपा, भाजपा व बसपा समेत लगभग सभी दलों के प्रत्याशियों को जिताकर सदन तक भेजने का कार्य किया है, लेकिन इधर करीब दो दशक में हुए राजनीतिक परिर्वतन के बाद जिले की सात विधानसभाओं में सपा, भाजपा व बसपा का दबदबा कायम हो गया।
एक समय था कि जिले की राजनीति के क्षेत्र में प्रखर वक्ताओं की कमी नहीं थी, लेकिन मौजूदा चुनाव में राजनीति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले दिग्गज चुप्पी साधे हुए हैं। इन दिग्गजों में ज्यादातर अस्वस्थ होने के चलते चुनावी अखाड़े से बाहर हैं।
बात करते हैं नानपारा सीट की। इस सीट से चार बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके पूर्व विधायक जटाशंकर सिंह मौजूदा समय अस्वस्थ होने के चलते चुनावी शोरगुल से बाहर हैं। जिले के हिंदूवादी नेताओं में शुमार भाजपा के कद्दावर नेता के रूप जाने जाने वाले पूर्व विधायक जटाशंकर एक दशक पूर्व विधानसभा व लोकसभा चुनाव में प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते थे।
अब बात करते हैं जिले के कद्दावर नेता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. वकार अहमद शाह की पत्नी की। वह भी अस्वस्थ होने के चलते किनारा किए हुए हैं, जबकि उनका बेटा सदर विधानसभा से सपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में है।
इसी तरह कांग्रेस के पूर्व विधायक व किसान पीजी कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एहतशामवली खान भी अस्वस्थ होने के चलते राजनीति से संन्यास ले चुके हैं। दलित नेता के रूप में मशहूर कांग्रेस के पूर्व विधायक रामसागर राव भी चुनावी माहौल से दूर है। उन्होंने बलहा सुरक्षित सीट से जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट न देने से आहत होकर 40 वर्षों तक कांग्रेस में रहने के बाद इस्तीफा दे दिया है।