राजधानी में शहर से सटे गांवों में हाईवे के किनारे बहुमंजिला इमारतों और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स की कीमत कृषि योग्य जमीनों ने चुकी हैं।
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महायोजना 2021 के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) अधिसूचित 197 गांवों में जिला पंचायत से नक्शे पास करवा कर भू-माफिया और बिल्डरों ने जमकर चांदी काटी है।
इन नक्शों के आधार पर कृषि योग्य जमीनों पर बहुमंजिला इमारतों, कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने के साथ फ्री-होल्ड प्लाट बेचे गए। आलम यह है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान जिला पंचायत से ऐसे 500 से अधिक भवन निर्माण के नक्शे जारी कर दिए गए।
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बिना किसी टेक्निकल कमेटी, भू-उपयोग व टाउन प्लानर के महज कुछ सिविल अभियंता व अपर मुख्य अधिकारी की कमेटी और उसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की संस्तुति मात्र पर आवासीय और व्यावसायिक भवन निर्माण का नक्शा जिला पंचायत से जारी करा बिल्डरों व भू माफियाओं ने राष्ट्रीय राजमार्गों से सटी जमीनों पर अवैध निर्माणों का बड़ा सबब बनी।
1986 से शुरू हुआ ये गोरखधंधा
40 साल पहले वर्ष 1986 में संशोधित हुए यूपी क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 239 (2) के बाद जिले के ग्राम्य क्षेत्र में भवन निर्माण को विनियमित और नियंत्रित करने की जिम्मेदारी जिला पंचायत को मिली थी।
तभी से जिला पंचायत भवनों के निर्माण कार्य हेतु नक्शा स्वीकृत करती रही है। मास्टर प्लान के तहत इस दौरान दो बार विस्तारित हुई शहरी सीमा से जिला पंचायत के कार्यक्षेत्र की अधिकांश भू संपत्ति एलडीए की कार्य परिधि में आ गई।
लेकिन वैधानिक औपचारिकता पूरी न होने की आड़ में प्राधिकरण अधिसूचित गांवों में भवन निर्माण नक्शा तब तक जारी रखा, जब तक शासन स्तर से इस पर रोक नहीं लगी।
इसी का फायदा उठाते हुए कई शिक्षण संस्थाओं के संचालकों व रीयल इस्टेट कारोबारियों ने शहरी सीमा से सटी खेतिहर जमीनों को सस्ती दर पर खरीदा और बिना किसी परेशानी के जिला पंचायत से मनचाहे भवन निर्माण नक्शे पर निर्माण कार्य कराते हुए करोड़ की कमाई की।
सबसे ज्यादा व्यावसायिक नक्शे पास हुए
प्राधिकरण अधिसूचित गांवों में पहले वर्ष 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष रहे बसपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष धर्मेंद्र प्रधान और उसके बाद सपा समर्थित वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष विजय बहादुर के कार्यकाल दौर में करीब पांच सौ भवन निर्माण नक्शे जारी होने की बात जिला पंचायत से जुड़े जिम्मेदार बताते हैं।
इन भवन निर्माण नक्शों में करीब 125 व्यावसायिक इस्तेमाल के और अन्य आवासीय श्रेणी के तहत बहुमंजिला निर्माण कार्य से जुड़े बताए जाते हैं।
शहरी सीमा के विस्तार के बाद एलडीए कार्यक्षेत्र में शामिल हुई सीतापुर रोड, हरदोई रोड, फैजाबाद रोड व सुल्तानपुर रोड पर बिल्डरों ने किसानों से सस्ती दर पर जमीनें खरीद एलडीए से बिना नक्शा स्वीकृत कराए अवैध तरीके से ग्रुप हाउसिंग के साथ व्यावसायिक इमारतें खड़ी कर दीं। एलडीए स्तर पर तैयार इन अवैध भवनों की सूची में फैजाबाद रोड पर सर्वाधिक 53 निर्मित भवन और कॉम्लेक्स हैं।
एनबीएसी के मानक का पालन जरूरी
इसके साथ ही सीतापुर रोड के 44, हरदोई रोड के 20 और सुल्तानपुर रोड पर 18 बहुमंजिला इमारतों के नक्शे भी जिला पंचायत से जारी भवन नक्शों के कारण कार्रवाई की सूची में दर्ज हैं।
जिला पंचायत स्तर से खाली जमीन पर आवासीय या व्यावसायिक निर्माण का नक्शा पास कराने के लिए आवेदन करने के एक माह के अंदर ही जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी चर्चा के बाद नेशनल बिल्डिंग कमेटी (एनबीसी) के मानक के आधार पर निर्माण कार्य का नक्शा स्वीकृत कर जारी कर देती है।
एकल आवासीय मकान को छोड़ अन्य निर्माण कार्य के लिए फायर विभाग की एनओसी भी औपचारिकता निभाने के लिए आवेदक से जमा करा ली जाती है।
जिला पंचायत से भवन नक्शा जारी कराने वाले बिल्डर और भू माफिया एलडीए स्तर से भवन नक्शा जारी कराने में होने वाली तमाम जरूरी औपचारिकताओं व सख्ती से बचने को ही अभी तक जिला पंचायत के नक्शों को ढाल बना काम चला रहे थे।
एलडीए तीन स्तर पर नक्शा स्वीकृत करने की प्रक्रिया अपनाता है। नक्शा स्वीकृत करने की शुल्क राशि भी अविकसित, विकसित व पूर्ण विकसित श्रेणी के आधार पर आवेदन से वसूली जाती है।
नक्शा पास कराने के लिए आवेदन के साथ रजिस्ट्री की फोटोकॉपी, पंजीकृत वास्तुविद् से बनवाया नक्शा, भू उपयोग संबंधी घोषणा पत्र, फायर एनओसी व तहसील संबंधी रिपोर्ट भी जमा करानी पड़ती है।
इन प्रपत्रों के साथ जमा आवेदन पर एलडीए सचिव की अध्यक्षता में गठित टेक्निकल कमेटी व टाउन प्लानर की रिपोर्ट के आधार पर ही नक्शा स्वीकृत कर जारी किया जाता है। इस झंझट से बचने के लिए ही सब कुछ जानते समझते भी नेशनल हाइवे किनारे के गांवों में बिल्डर नक्शा पास कराने में जिला पंचायत को ढाल बनाए रहे।