लखनऊ। शहर में कितने पटरी दुकानदार हैं और कितने नए वेंडिंग जोन बनाए जा सकते हैं, इसको लेकर सात दशक के बाद नगर निगम सर्वे कराएगा। टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य भी सर्वे में शामिल रहेंगे। बृहस्पतिवार को हुई टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक यह प्रस्ताव पास हुआ। करीब दो घंटे चली बैठक में अन्य प्रस्तावों पर चर्चा तो हुई मगर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।
करीब सात साल पहले पटरी दुकानदारों का सर्वे हुआ था। उस सर्वे के आधार पर 11 हजार से अधिक पटरी दुकानदार नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। जानकारों के अनुसार इतना समय बीतने के कारण शहर में पटरी दुकानदारों की संख्या एक लाख से अधिक हो चुकी है। यही वजह है कि नगर निगम ने शहर में 202 वेंडिंग जोन चिह्नित किए हैं मगर पूरे शहर में एक हजार से ज्यादा जगहोंं पर पटरी वाली दुकानें लग रही हैं। फेरी नीति के तहत पटरी दुकादारों का सर्वे हर पांच साल पर होना चाहिए, जिसकी मांग टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में उठी। कमेटी ने मांग पर सहमति जताई और सर्वे के लिए गाइडलाइन तैयार की बात कही।
प्रस्तावों पर चर्चा हुई, निर्णय बाद में होगा
कमेटी के सदस्य अशोक गुप्ता ने बैठक में अमीनाबाद बाजार को विरासत मार्केट बनाने, बकाया वेंडिंग शुल्क पर ब्याज लगाने, नए वेंडिंग जोन बनाने और टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्यों को भत्ता देने सहित कई प्रस्ताव रखे गए। इन मांगों पर चर्चा के बावजूद कोई निर्णय नहीं हो पाया। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने सदस्यों की चर्चा सुनने के बाद कहा कि जो भी मांगे हैं उनका नियमों के आधार पर परीक्षण के बाद स्वीकृति पर निर्णय लिया जाएगा।
दुकानें न हटाने पर भी चर्चा नहीं
फेरी नीति के तहत वेंडिंग जोन में कोई भी दुकान स्थाई नहीं होगी। दुकान सुबह लगाई जाएगी और शाम को हटा ली जाएगी, लेकिन राणा प्रताप मार्ग, अमीनाबाद, बसंत विहार, अलीगंज सेक्टर जैसे सभी वेंडिंग जोन में दुकानें हटाई नहीं जाती हैं। दुकानदार स्थाई रूप से दुकानें लगाए रहते हैं। जिससे जाम और गंदगी की समस्या होती है। शुक्रवार को हुई टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में इस मसले पर कोई चर्चा नहीं हुई।
विवाद के बाद पार्षद रंजीत ने कमेटी से इस्तीफा
टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य व भाजपा पार्षद रंजीत यादव की बैठक में नगर आयुक्त गौरव कुमार से बहस हो गई। बैठक के बाद पार्षद ने महापौर को कमेटी के सदस्य पद का इस्तीफा भेज दिया। पार्षद ने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त ने उनका अपमान किया। पार्षद का पत्र देर शाम सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पार्षद का कहना है कि उन्होंने 10 महीने बाद बैठक बुलाए जाने पर आपत्ति की तो नगर आयुक्त ने कहा कि अध्यक्ष होने के नाते वह कुछ भी कर सकते हैं। पार्षद ने कहा कि ऐसा है तो उन्हें कमेटी से बाहर कर दिया जाए। महापौर सुषमा खर्कवाल ने विवाद की जानकारी से इन्कार किया। इस बारे में नगर आयुक्त से संपर्क किया गया तो उनसे बात नहीं हो सकी।