विद्युत विभाग से हुई वार्ता में तय हुआ है कि कनेक्शन के लिए आवेदन प्रधानाध्यापक करेंगे। हालांकि उनकी बिल भुगतान की जिम्मेदारी नहीं होगी। कनेक्शन विद्यालय के नाम से दिया जाएगा व बिल भुगतान की जिम्मेदारी भी विद्यालय स्तर पर होगी। इसके साथ ही पोर्टल पर आवेदन में विद्यालय स्थल के वैध उपयोग के प्रमाण पत्र के लिए जरूरी दस्तावेज भी लगते हैं।
इसके लिए तय हुआ है कि कनेक्शन के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने स्तर से सभी बिना बिजली कनेक्शन वाले विद्यालयों के नाम, यू-डायस, ब्लॉक की सूची प्रमाणित करके अधिशासी अभियंता को भेजेंगे। इसके आधार पर कनेक्शन देने की कार्यवाही होगी।
कहीं उपकरण तो, कहीं कनेक्शन नहीं
सर्वे में विद्यालयों में बिजली न होने के अलग-अलग कारण सामने आए हैं। कई विद्यालय ऐसे मिले जहां उपकरण तो थे, पर कनेक्शन नहीं था। कुछ जगह तार चोरी होने व लंबे समय से बिजली न होने की बात सामने आई। कई विद्यालय ऐसे हैं जो खंभे से दूर हैं और वहां तक कनेक्शन के लिए अपेक्षित बजट विभाग या ग्राम पंचायत के पास नहीं है। तो कई ऐसे हैं, जहां न उपकरण हैं और न कनेक्शन।
ऐसा क्यों हुआ? यह ज्यादा स्पष्ट नहीं हो सका। हालांकि 2018 से पूर्व तक का बिजली बकाया बेसिक शिक्षा विभाग ने चुका दिया है। उसके बाद से ग्राम पंचायतों को बिल भरने की जिम्मेदारी दी गई है।