उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान फर्जी ई-वे बिल के जरिए बोगस माल आपूर्ति के अलावा सीमेंट, बिटुमिन, कच्चे चमड़े, प्लास्टिक के दाने, बीओपीपी फिल्मों और धातुओं की आपूर्ति के लिए फर्जी बिल जारी करने का मामला उजागर हुआ। दोनों आरोपी व्यापारियों द्वारा फर्जी चालान देकर ग्राहकों को इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) का भी लाभ दिलाया जा रहा था।
महानिदेशक ने बताया कि जांच-पड़ताल से पता चला कि दोनों व्यापारियों द्वारा पिछले एक साल में करीब 400 करोड़ रुपये का फर्जी चालान जारी कर 60 करोड़ से अधिक जीएसटी की चोरी की गई है। दोनों व्यापारियों द्वारा भरे गए जीएसटी रिटर्न में आईटीसी के माध्यम से जिस माल की खरीद पर जीएसटी का भुगतान दिखाया था, वह माल उन्होंने कभी खरीदा ही नहीं था।
इसी तरह ट्रांसपोर्टरों से मिलीभगत करके भी फर्जी माल ढुलाई दिखाने का भी मामला सामने आया है। फर्जी तारीख में फर्जी ई-वे बिल पर माल ढुलाई दिखाकर उसका आरटीजीएस से भुगतान करते थे और बाद में कमीशन काट कर शेष धनराशि वापस ले लेते थे।