लखनऊ। मैं एसयूवी ड्राइव कर रहा था...मेरे पिता बगल वाली सीट पर बैठे थे और मां पीछे वाली सीट पर थीं। तभी अचानक मेरी एसयूवी के आगे चल रहे ट्रक चालक ने ब्रेक लगा दिया। ये देख मैंने भी ब्रेक लगाया और बचने के लिए एसयूवी एक तरफ मोड़ी...। एसयूवी का एक हिस्सा ट्रक से टकराया और एसयूवी तीन बार पलटते हुए सड़क किनारे जा गिरी। पलक झपकते सबकुछ खत्म हो गया.। मैंने अपने माता-पिता खो दिए..।दहशत और दुख भरा मंजर रविवार को खुद दंपती के बेटे दिव्यांक ने बयां की।
डालीबाग निवासी राजेश अवस्थी (58) और उनकी पत्नी फरहा अवस्थी (55) अपने बेटे दिव्यांक के साथ गुरुग्राम में रहते थे। शनिवार को पूरा परिवार एसयूवी से उज्जैन महाकाल दर्शन करने जा रहे थे। तभी राजस्थान के दौसा शहर में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हादसा हो गया था। इसमें राजेश और फरहा की मौत हो गई थी। दिव्यांक मामूली रूप से घायल हो गए थे।
शनिवार देर रात दंपती के शव शहर लाए गए। रविवार को बैकुंठधाम में अंतिम संस्कार किया गया। माता-पिता की मौत से दिव्यांक पूरी तरह से टूट गए हैं। वहीं हादसे की खबर पाकर पहुंचे उनके रिश्तेदार और परिचितों की भी आंखें नम हो गईं। हर कोई दिव्यांक को सांत्वना देता नजर आया।
माता-पिता खून से लथपथ थे, खुद उनको बाहर निकाला
एसयूवी के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। दिव्यांक ने बताया कि किसी तरह से वह एसयूवी से बाहर निकले। गनीमत थी कि उनको कम चोट थी। आसपास के लोगाें की मदद से एसयूवी सीधी की। उसके भीतर फंसे खून से लथपथ उनके माता-पिता को बाहर निकाला। पुलिस ने एंबुलेंस से सभी को अस्पताल पहुंचाया।
कदम दर कदम वक्त हुआ जाया, इलाज में देरी जान पर पड़ी भारी
दिव्यांक ने बताया कि उनके सूचना देने के करीब 15 मिनट बाद पुलिस पहुंची। उसके करीब 20 मिनट बाद एंबुलेंस आई। घटना स्थल से अस्पताल की दूरी करीब 15 किमी थी, इसलिए वहां तक पहुंचने में भी बीस मिनट से अधिक लग गया। जब अस्पताल पहुंचे तो वक्त पर स्ट्रेचर तक नहीं मिल सका। वक्त पर इलाज भी नहीं मिला। इसलिए माता-पिता की जिंदगी चली गई।