लखनऊ। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की ओर से फरवरी में अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने के आदेश रोक नहीं लगाई है। ऐसे में करीब 10 महीने तक चली सुनवाई के बाद जो आदेश आया है उससे करीब 5000 आवंटियों को राहत नहीं मिली। आदेश के तहत अब आवंटी और निवेशक 15 से 20 दिन में एनसीएलटी में अपना पक्ष रख सकते हैं। अपीलीय न्यायाधिकरण ने एनसीएलटी को फिर से पक्ष सुनने का आदेश दिया है।
कई महीने तक सुनवाई टलने के बाद बीते 17 दिसंबर को एनसीएलएटी में अंसल मामले की सुनवाई पूरी हुई थी और फैसला सुरक्षित कर लिया गया था। एनसीएलएटी ने बुधवार को फैसला जारी किया। आवंटी व निवेशक गगन टंडन का कहना कहा कि एनसीएलएटी के आदेश ने एक और मौका आवंटियों को दिया है ताकि एनसीएलटी के सामने आवंटी अपना पक्ष रख सकें। अब दो सप्ताह के अंदर आवंटी एनसीएलटी में अपना पक्ष रखेंगे। गगन ने बताया कि अपीलीय न्यायाधिकरण मुख्य रूप से यह देखता है कि निचली कोर्ट ने जो आदेश जारी किया है उसमें कोई खामी तो नहीं है। एनसीएलटी ने अंसल को वित्तीय संस्थान आईएलएफएस के करीब 83 करोड़ रुपये बकाया न चुकाने पर दिवालिया घोषित किया था। पहले एनसीएलटी ने आवंटियों का पक्ष नहीं सुना था और याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अब एनसीएलटी के पास कुछ निर्देश के साथ भेजा है जिसमें हाईटेक टाउनशिप के नियमों को देखा जाएगा ताकि आवंटियों का हित सुरक्षित हो सके। एलडीए भी एनसीएलटी के पास जा सकता है, पहले वह नहीं जा पाया था। कोर्ट ने लखनऊ के लिए अगला रिसीवर नियुक्त करने का भी आदेश दिया है।
दावा...बिना एलडीए का पक्ष सुने पारित नहीं होगा कोई आदेश
एनसीएलटी की आपीलीय कोर्ट का फैसला आने के बाद एलडीए ने बयान जारी कर यह दावा किया गया है कि एनसीएलएटी ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के पक्ष को स्वीकार किया। ट्रिब्यूनल ने एनसीएलटी को निर्देश दिए हैं कि बिना एलडीए का पक्ष सुने प्रकरण में कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाएगा। एनसीएलटी ने अंसल को दिवालिया घोषित करने का फैसला सुनाते समय एलडीए, आवास विभाग समेत किसी भी शासकीय विभाग को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही पक्ष सुना था। इससे अंसल पर शासकीय विभागों की देयता के साथ ही होम बायर्स का हित भी फंस गया था। मुख्यमंत्री ने पीड़ित होम बायर्स के हितों का संज्ञान लेते हुए अंसल ग्रुप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे जिसके अनुपालन में एलडीए ने अंसल ग्रुप के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ एनसीएलएटी (नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल) में प्रभावी पैरवी की। हाईटेक टाउनशिप नीति के अनुसार योजना पूर्ण करने के लिए परफार्मेंस गांरटी के रूप में अंसल ने एलडीए के पक्ष में 411 एकड़ भूमि बंधक रखी है। जांच में सामने आया है कि अंसल ने अनधिकृत तरीके से उक्त बंधक भूमि का भी विक्रय किया है। इस मामले में एलडीए ने एनसीएलटी में अंसल ग्रुप पर 4500 करोड़ रुपये की देनदारी का दावा भी प्रस्तुत किया है। इसमें अर्जन, मानचित्र आदि का शुल्क भी शामिल है।