लखनऊ। जलकल विभाग में करीब 20 करोड़ रुपये की हुई गड़बड़ी के मामले में अफसर सफाई नहीं दे पा रहे हैं। ऑडिट में पकड़े गए इस घपले की करीब आठ महीने से जांच चल रही है और अभी तक केवल करीब आठ करोड़ रुपये का ही हिसाब मिल सका है। ऐसे में कई जिम्मेदारों की गर्दन फंस सकती है।
स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ओर से पिछले साल हुई ऑडिट में सात वर्षों के खर्च की जांच में घपला सामने आया था। इसमें सीवर सफाई के नाम पर करीब 3 करोड़ के डीजल-पेट्रोल घपला, बिना टेंडर 69 नलकूपों की रिबोरिंग में 43 लाख की हेराफेरी, महंगी दरों पर सामान की खरीद और बिना टेंडर अन्य कार्य शामिल हैं। इसको लेकर अमर उजाला ने खबर भी प्रकाशित की थी।
इसके बाद शासन ने जांच की तो जलकल विभाग ने सफाई दी कि वह आपत्तियों का जवाब भेज रहा है, लेकिन आठ महीने बाद भी खर्च का पूरा हिसाब नहीं दे पाया है। जिसको लेकर नगर विकास विभाग ने फिर एक बार जवाब मांगा है।