बाघ के हमले में दम तोड़ने वाली गीता की खबर ग्रामीणों ने रेंज कार्यालय पर घटना के तुरंत बाद दी। लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। इस पर ग्रामीणों में काफी आक्रोश रहा। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने सभी को समझा बुझाकर शांत किया।
बाघ का निवाला बनी गीता का परिवार काफी गरीब है। परिवार में गीता के माता-पिता के अलावा उसके चार भाई और चार बहन हैं। ऐसे में मेहनत मजदूरी का ही सहारा है। गीता भी मेहनत मजदूरी कर परिवार का हाथ बंटाती थी। उसकी मौत के बाद मां राजरानी पछाड़े खा-खाकर गिर रही हैं। वहीं भाई-बहन की आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे। गीता के पिता प्यारेलाल हल्द्वानी में मजदूरी करते हैं। दोपहर बाद घटना की सूचना पिता को फोन से दी गई तो वह फोन पर ही बिलख पड़े।