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Lucknow News: जहां से लिया जाता है शहर के पीने का पानी वहीं पर गोमती में मिल रहे नाले

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गऊघाट पंपिंग स्टेशन के पास बने बैराज से गोमती में जा रहा नाले का गंदा पानी।  - फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ। गोमती नदी की अपस्ट्रीम से जहां से ऐशबाग और बालागंज जलकल के लिए कच्चा पानी लिया जाता है, उससे थोड़ा पहले ही सीवर व नाले का गंदा पानी नदी में सीधे मिल रहा है। यहां पर जल निगम का जो सीवेज पंपिंग स्टेशन बना है उसकी क्षमता कम है, जबकि वहां पर सीवर व नाले का पानी अधिक आ रहा है। इससे वह ओवरफ्लो रहता है और गंदा पानी नदी में जाता है। ऐसे में पानी को शोधित करने पर अधिक केमिकल खर्च किया जा रहा है।
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गऊघाट पंपिंग स्टेशन के ठीक बगल में जल निगम के दौलतगंज एसटीपी का सीवेज पंपिंग स्टेशन बना है। यह कम क्षमता का है जबकि सीवर अधिक आता है। इसमें नगरिया नाले का भी पानी आता है, लेकिन नाले का आधा पानी ही पंपिंग स्टेशन में जाता है। आधा ऐसे ही सीधे गोमती नदी में गऊघाट इंटेक से पहले मिल रहा है और गंदा पानी गऊघाट तक जा रहा है। इसके अलावा इंटेक पाॅइंट से थोड़ा आगे भी दौलतगंज एसटीपी का गंदा पानी भी गऊघाट के इंटेक चैनल में तक जा रहा है जिससे गऊघाट से जो पानी बालागंज और ऐशबाग जलकल को भेजा जाता है उसे नाले और सीवर का गंदा पानी दूषित कर रहा है।



इस तरह दूर हो सकती है समस्या

दौलतगंज एसटीपी की क्षमता 56 एमएलडी है, लेकिन यहां पर इस समय करीब 70 एमएलडी सीवर और नाले का पानी आ रहा है। इस कारण रोजाना करीब 14 एमएलडी नाले और सीवर का गंदा पानी सीधे गोमती में जा रहा है। इसे रोकने के लिए ही अब दौलतगंज में 42 एमएलडी का एक और एसटीपी बनाया जाना है। इसके बनने पर दौलतगंज एसटीपी की क्षमता बढ़कर 98 एमएलडी हो जाएगी जिससे समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन अभी यह योजना कागज पर ही है।
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फैक्ट फाइल

56 एमएलडी है दाैलतगंज एसटीपी की मौजूदा क्षमता

70 एमएलडी सीवर व नाले का पानी अभी आता है यहां

42 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी बनाने का है प्रस्ताव


नमामि गंगे योजना में जल निगम ने प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा है जिसमें नया एसटीपी बनाया जाएगा और नालों को गोमती में गिरने से रोका जाएगा। पीने के लिए जिस पानी की आपूर्ति की जाती है उसकी गऊघाट और जलकल के ट्रीटमेंट प्लांट दोनों जगहों पर जांच की जाती है। इसके बाद ही आपूर्ति की जाती है। पानी को शुद्ध बनाने के लिए कई बार अधिक रसायन खर्च होता है। हर दिन रोज सुबह टीम शहर में निकलकर पेयजल के नमूनों की जांच भी करती है।
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- कुलदीप सिंह,
महाप्रबंधक जलकल
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