लखनऊ। बिजली विभाग में वर्टिकल व्यवस्था लागू हुए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं और फील्ड इंजीनियरों को भुगतना पड़ रहा है। कलेक्शन और वितरण इकाइयों के बीच तालमेल की कमी से राजधानी की बिजली व्यवस्था बेपटरी हो गई है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि कलेक्शन इकाई के जेई, एई और एक्सईएन के मोबाइल नंबर अब तक 1912 हेल्पलाइन सिस्टम में दर्ज नहीं किए गए हैं। जब कलेक्शन टीम किसी बकायेदार की बिजली काटती है और उपभोक्ता बिल भरने के बाद सप्लाई शुरू कराने के लिए 1912 पर कॉल करता है, तो वहां से उपकेंद्र (वितरण इकाई) के इंजीनियरों का नंबर दे दिया जाता है।
उपकेंद्र के इंजीनियरों के पास ऑनलाइन बिजली चालू करने का अधिकार ही नहीं है। जब वे मना करते हैं, तो उपभोक्ता उनसे अभद्रता करते हैं। दूसरी ओर, कलेक्शन इकाई के जिम्मेदार इंजीनियर उपभोक्ताओं का फोन ही नहीं उठाते।
सर्वर के नाम पर लौटाए जा रहे उपभोक्ता
राजधानी के कई बिलिंग केंद्रों पर समय से बिल जमा नहीं हो पा रहे हैं। कई केंद्रों पर ऑपरेटर ''सर्वर ठप'' होने का बहाना बनाकर उपभोक्ताओं को लौटा देते हैं, जिससे राजस्व वसूली पर बुरा असर पड़ रहा है।
जनसुविधा केंद्रों पर वॉलेट का संकट
जनसुविधा केंद्रों के जरिये बिल जमा करने वालों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। केंद्रों के संचालक समय पर अपना डिजिटल वॉलेट रिचार्ज नहीं करते। नियम यह है कि जितना बिल जमा होगा, उतनी राशि वॉलेट से विभाग के खाते में जाती है। वॉलेट खाली होने के कारण उपभोक्ताओं को एक केंद्र से दूसरे केंद्र भटकना पड़ रहा है।