लखनऊ। राजधानी में बिजली आपूर्ति को वर्टिकल सिस्टम में बदलने की तैयारियां भले पूरी कर ली गई हों, लेकिन नई व्यवस्था की शुरुआत अधीक्षण अभियंताओं की कमी के साए में होने जा रही है। फिलहाल मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में चार अधीक्षण अभियंताओं के पद रिक्त हैं, जबकि एक नवंबर से हर जोन में दो-दो इकाइयां वाणिज्य और तकनीकी काम करेंगी। ऐसे में एक ही अधिकारी को दो-दो जिम्मेदारियां संभालनी होंगी।
अमौसी, लखनऊ सेंट्रल, जानकीपुरम और गोमतीनगर, राजधानी के इन चार जोनों में इस वक्त केवल एक-एक अधीक्षण अभियंता तैनात हैं। अमौसी जोन में भविष्य कुमार सक्सेना, लखनऊ सेंट्रल में केके चौधरी, जानकीपुरम में गीता आनंद और गोमतीनगर में प्रेमलता तैनात हैं। वर्टिकल सिस्टम लागू होते ही इन्हीं अधिकारियों को वाणिज्यिक इकाई (बिलिंग, राजस्व और उपभोक्ता सेवाओं) के साथ-साथ तकनीकी इकाई (बिजली आपूर्ति, लाइन मेंटेनेंस और फॉल्ट निवारण) दोनों की जिम्मेदारी निभानी होगी।
पहले ही दिन से चुनौती
नई व्यवस्था के पहले दिन से ही अधीक्षण अभियंताओं पर काम का बोझ दोगुना हो जाएगा। अब तक एक जोन की तकनीकी निगरानी तक सीमित रहने वाले ये अधिकारी अब उपभोक्ता सेवाओं और वाणिज्यिक कार्यों की भी देखरेख करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं होती, तब तक उपभोक्ता सेवाओं की गति प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।
तैयारियां पूरी, आदेश का इंतजार
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने चारों जोनों में नई व्यवस्था लागू करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। संभावना है कि शनिवार को वर्टिकल सिस्टम लागू करने का औपचारिक आदेश जारी हो जाएगा। निगम प्रबंधन का दावा है कि नई व्यवस्था से कार्यकुशलता बढ़ेगी और जवाबदेही तय होगी। हालांकि, अधीक्षण अभियंताओं की कमी इसके सफल क्रियान्वयन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
जरूरत न होने पर मुख्यालय से जोड़े जाएंगे कर्मचारी
वर्टिकल सिस्टम के तहत दावा किया गया है कि मौजूदा ढांचे की तुलना में कम अभियंताओं और कर्मचारियों के साथ अधिक कुशलता से काम किया जाएगा। जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की सेवाओं की आवश्यकता नहीं होगी, उन्हें मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय संबद्ध किया जाएगा। वहां से प्रबंध निदेशक तय करेंगे कि उन्हें मुख्यालय में रखा जाए या किसी अन्य जिले में तैनाती दी जाए।