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Lucknow : प्रयागराज के अमरदीप हॉस्पिटल पर 5.21 लाख रुपये का जुर्माना, ऑपरेशन के दौरान छोड़ दी थी पट्टी

Thu, 01 Sep 2022 07:23 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

राज्य आयोग ने यह भी पाया कि डाॅ. केके सिंह एक राजकीय चिकित्सक हैं, जिन्होंने प्राइवेट अस्पताल में जा कर आपरेशन किया। यह एमसीए और राज्य सरकार के आदेशों का उल्लंघन है। जहां पर सरकारी डॉक्टर पर प्राईवेट प्रैक्टिस के लिए रोक लगाई गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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घायल व्यक्ति का ऑपरेशन करने के दौरान उसमें गाज पट्टी छोड़ने के मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला उपभोक्ता फोरम प्रयागराज के आदेश को सही मानते हुए यथावत रखा है। अमरदीप हॉस्पिटल को अब पीड़ित को 521850 रुपये ब्याज सहित अदा करना होगा।

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प्रकरण प्रयागराज का है। एक मार्च 2007 को ट्रैक्टर से आते समय वादी रंजीत सिंह एक्सीडेंट में घायल हो गया था। उसकी बायीं जांघ में फ्रैक्चर हो गया। रंजीत ने अमरदीप अस्पताल, प्रयागराज में अपना इलाज कराया तथा उसकी जांघ का आपरेशन वहां डा. केके सिंह ने किया। आपरेशन के पश्चात् उसे  22 मार्च 2007 को अस्पताल से छुट्टी दी गई। कुछ महीने बाद रंजीत के आपरेशन वाले स्थान से पस आना शुरू हो गया। वह पुन: डा. केके सिंह से मिला जिन्होंने दोबारा ऑपरेशन करने के लिए उससे 50 हजार रुपये जमा करने को कहा, जबकि वह पहले आपरेशन में 60 हजार रुपये जमा कर चुका था और अब और अधिक देने की उसकी क्षमता नहीं थी।

उसने श्रीनारायण आश्रम हास्पिटल जा कर अपना इलाज कराया जहां पर उसका दूसरा ऑपरेशन किया गया। पाया गया कि पहले आपरेशन वाले स्थान पर गाज पट्टी छूट जाने के कारण संक्रमण हो गया था। इस गाज पट्टी को निकाला गया। इसके पश्चात् परिवादी ने जिला फोरम, प्रयागराज में एक परिवाद दायर किया जिस पर जिला फोरम ने अमरदीप हॉस्पिटल को आदेश दिया कि वह रंजीत को 5,21,850 रुपये 10 प्रतिशत ब्याज सहित  दो माह के भीतर अदा करे और इसके अतिरिक्त 5,000 रुपये वाद व्यय भी दे।
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अमरदीप हास्पिटल ने इसके विरुद्घ राज्य उपभोक्ता आयोग, लखनऊ में अपील की। पत्रावली यहां न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह एवं न्यायाधीश विकास सक्सेना की पीठ के समक्ष प्रस्तुत हुई। पीठासीन न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि आपरेशन के स्थान पर गाज पट्टी का छोड़ा जाना घोर चिकित्सीय लापरवाही और उपेक्षा का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि डा. केके सिंह द्वारा आपरेशन के समय गंभीर अनियमितता की गई।

राज्य आयोग ने यह भी पाया कि डाॅ. केके सिंह एक राजकीय चिकित्सक हैं, जिन्होंने प्राइवेट अस्पताल में जा कर आपरेशन किया। यह एमसीए और राज्य सरकार के आदेशों का उल्लंघन है। जहां पर सरकारी डॉक्टर पर प्राईवेट प्रैक्टिस के लिए रोक लगाई गई है। यह भी पाया गया कि डा. केके सिंह अमरदीप हास्पिटल के डॉक्टरों के पैनल में भी शामिल नहीं हैं। राज्य आयोग ने माना कि यह कार्य अत्यंत लापरवाही का है जिसके लिए जिला फोरम ने उचित आदेश पारित किया है। 

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