केजीएमयू के प्राइवेट वार्ड में इलाज और जांच के नाम पर मरीजों को लूटा जा रहा है। यहां प्राइवेट वार्ड की फीस तो कम कर दी गई लेकिन जांच शुल्क में मरीजों को कोई राहत नहीं दी गई। ऐसे में प्राइवेट वार्ड के मरीजों को जनरल वार्ड की अपेक्षा इलाज दस गुना महंगा पड़ रहा है।
विज्ञापन
इसके पीछे केजीएमयू प्रशासन, एडवाइजरी बोर्ड, विभागाध्यक्षों और जांच का जिम्मा संभाल रही पीओसीटी कंपनी की मिलीभगत बताई जा रही है। केजीएमयू प्रशासन सबकुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है।
केजीएमयू में पांच तरह के प्राइवेट वार्ड हैं जिनका एक दिन का शुल्क 600 रुपये से लेकर 1500 रुपये है। केजीएमयू प्रशासन ने बीते एक मई को दिखावे के लिए 57 तरह की पैथोलॉजी जांचों में रियायत दी गई।
विज्ञापन
जबकि सैकड़ों तरह की पैथोलॉजी जांचों और प्रोसीजर केस के रेट में कोई कमी नहीं की गई। प्राइवेट वार्ड की फीस तो कम हो गई है लेकिन जांच फीस में कोई कमी नहीं करने से मरीजों और तीमारदारों को मोटी रकम चुकानी पड़ रही है।
एक साल में 40 से 45 फीसदी की बढ़ोतरी
डेमो
- फोटो : demo pic
सूत्रों की मानें तो केजीएमयू प्रशासन ने पिछले एक साल में इन जांचों में कम से कम 40 से 45 फीसदी की बढ़ोतरी की है। महिला रोग विभाग और सर्जिकल आंकोलॉजी में होने वाली जांचों और प्रोसीजर के नाम पर दस गुना अधिक फीस वसूली जा रही है।
जबकि नियमत: जनरल वार्ड की तुलना में प्राइवेट वार्ड में जांच या प्रोसीजर फीस 15 से 20 फीसदी तक महंगी हो सकती है। केजीएमयू में जनरल वार्ड और प्राइवेट वार्ड के लिए अलग-अलग जांच फीस और प्रोसीजर फीस है। लेकिन पीजीआई और लोहिया संस्थान में ऐसी व्यवस्था नहीं है।
प्राइवेट और जनरल वार्ड के मरीजों से एक समान शुल्क लिया जाता है। केजीएमयू के एक डॉक्टर की मानें तो ये व्यवस्था केजीएमयू के अफसरों ने जांच करने वाली कंपनी के साथ मिलकर तय किए हैं। इसी मनमानी का नतीजा है कि मरीजों से इलाज व जांच के बहाने मोटी रकम वसूली जा रही है।
वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट, सीएमएस प्रो. यूबी मिश्रा, प्रो. वीएस नारायन, प्रो. अर्चना कुमार, प्रो. रवि मिश्रा, प्रो. विनिता सिंह, प्रो. एएस सोनकर, प्रो. नंदलाल, प्रो. श्रद्धा सिंह, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. राकेश कुमार यादव, डॉ. कमल कुमार प्रो. विजय कुमार, प्रो. एसपी जैसवार, प्रो. अनुपम वाखलू, प्रो. यूएस पाल, प्रो. सुनील जुरैल, प्रो. हैदर अब्बास, प्रो. आशीष वाखलू, प्रो. अजय सिंह और मैट्रन एनआर सिंह थे। इन्हें पता था कि इन 57 जांचों के साथ अन्य जांचें भी हैं जिसके लिए मरीजों को हजारों रुपये देने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी सभी ने पूरे मसले पर आंख बंद रखीं।
सूत्र बताते हैं कि वीसी और 20 सदस्यीय एडवाइजरी बोर्ड ने 57 तरह की पैथोलॉजी जांचों के दाम 25 से 30 फीसदी घटाए हैं। दूसरी ओर जनरल वार्ड और प्राइवेट वार्ड की जांचों के दाम नहीं घटाए हैं। इसी के बहाने 57 जांचों में हुए घाटे को दूसरी महंगी जांचों से आने वाली रकम से मैनेज किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि ये सिर्फ दिखावे के लिए है।
एडवाइजरी बोर्ड बैठक के बाद पैथोलॉजी की 57 तरह की जांचों के साथ रेडियोलॉजी जांच को सस्ता किया गया था। अब दोबारा होने वाली बैठक में अलग-अलग विभागों में जांच फीस की दरों को कम करने पर विचार किया जाएगा। प्राइवेट वार्ड में मरीजों से जो फीस ली जा रही है वह पहले से निर्धारित है। इस संबंध में कुलपति से बात की जाएगी। प्राइवेट वार्ड में भर्ती मरीजों को सस्ती दर पर इलाज व जांच मुहैया कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। - डॉ. नरसिंह वर्मा, मीडिया प्रभारी, केजीएमयू