एटीएस के सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों के घर पर अफगानिस्तान व पाकिस्तान सहित ईरान के लोगों का आनाजाना था। इसमें कई संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। यही विदेशी संदिग्ध लोगों के जरिए ही आतंक का कारोबार उत्तर प्रदेश में फैलाना चाहते थे। इसके लिए भारी मात्रा में विस्फोटक भी उपलब्ध कराया गया था। कुछ दिन पहले तीन-चार संदिग्ध पाकिस्तानी काकोरी आए थे। उन्होंने पूरी साजिश रची थी। इसके बाद उसी एसयूवी से कश्मीर गए थे जो शाहिद के गैराज से एटीएस ने बरामद की है। इसके बाद से जम्मू कश्मीर व केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी एसयूवी के नंबर को एटीएस से साझा किया था। इसके बाद ही दोनों आतंकियों को पकड़ लिया गया।
संदिग्ध वीडियो देखता था मिनहाज
अदनानपल्ली में ही रहने वाले युवक के मुताबिक मिनहाज अहमद एकदम शांत रहता था। वह बिना किसी कारण किसी से बात नहीं करता था। लेकिन वह जब भी साथ में होता और कोई बात न होती थी तो वह संदिग्ध वीडियो अपने मोबाइल में देखता था। वीडियो के बारे में जब उससे कुछ पूछता तो वह कह देता कि तुम लोगों के काम की नहीं है।
दस्तावेज व नक्शे जलाकर गैराज से भाग निकले पांच लोग
शाहिद के गैराज में पांच लोग छिपे हुए थे। ये लोग रात में बाहर घूमे, फुटपाथ पर बैठकर काफी बातें किए फिर रात में सोने चले गये। पर एटीएस के कमांडों ने जब छापा मारा तो ये लोग गैराज के अंदर इधर-उधर भागने लगे। इस बीच पांच लोग गैराज की छत पर चले गये। कमांडो जब गैराज के अंदर घुसे तो वहां सिर्फ दो लोग ही मिले। गैराज के अंदर कुछ कागज जले हुए मिले। बताया जा रहा है कि इनमें एक नक्शा भी था। यह नक्शा कहां का था और किस इरादे से इस नक्शे को ये लोग लिये हुए थे। इस बारे में पता लगाया जा रहा है। माना जा रहा है कि आंतकियों को जो ऑपरेशन करना था, यह उसका ही नक्शा था।