लखनऊ में हजरतगंज कोतवाली में रेलवे में ग्रुप डी के पद पर भर्ती के नाम पर लाखों रुपये ठगने के आरोप में लालबाग निवासी ओंकार तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इंस्पेक्टर अंजनी कुमार पांडेय ने बताया कि ओंकार खुद को सचिवालय में स्टेनो के पद पर तैनात बताकर नौकरी लगवाने का ठेका लेता था। मामले की जांच की जा रही है।
इंस्पेक्टर ने बताया कि रायबरेली के खीरों के बरहा स्थित सराय मिश्रन गांव निवासी अवध कुमार निजी स्कूल में शिक्षक हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने अपने परिचित उन्नाव के औरांव हिलौली दुंदपुर निवासी प्रहलाद के जरिए ओंकार तिवारी से मुलाकात की थी। प्रहलाद का कहना था कि ओंकार उसके चाचा के साथ सचिवालय में तैनात है और उसने कई लोगों को सरकारी नौकरी दिलवाई है। ओंकार ने अवध कुमार से ग्रुप डी की भर्ती निकलने की बात कही। उसने कहा कि अगर कोई परिचित अथवा रिश्तेदार नौकरी चाहता है तो वह उसे तैनाती दिला सकता है। अवध ने अपनी पत्नी ममता के लिए नौकरी की बात की। ओंकार ने नौकरी दिलाने के एवज में तीन लाख रुपये मांगे। उसका कहना था कि 50 प्रतिशत रकम एडवांस देनी होगी और बाकी के रुपये तैनाती के बाद।
अवध कुमार का कहना है कि वह आठ अप्रैल 2018 को ओंकार के लालबाग वाल्मीकि मार्ग स्थित घर जाकर चेक से 40000 रुपये दिए। इसके बाद 16 अप्रैल को 20000 रुपये व तीन मई को 10000 रुपये और दिए। हालांकि, नौकरी नहीं मिली। रुपया वापस मांगने पर उसने गाली-गलौज व जानमाल की धमकी देते हुए भगा दिया। अवध ने डीजीपी मुख्यालय में शिकायत की थी जिसकी जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया। इस बीच पुलिस ने दोनों पक्ष को थाना बुलाकर समझौता कराया जिसमें ओंकार ने दोनों को कुछ चेक व नकद रुपये वापस भी किए।
रिश्तेदार से भी वसूले तीन लाख रुपये
अवध कुमार ने बताया कि फिरोजाबाद में वह अपने बहनोई के घर गया था जहां जैनेंद्र से मुलाकात हुई। उन्होंने जैनेंद्र को ओंकार और रेलवे के ग्रुप डी में नौकरी के बारे में बताया। जैनेंद्र ने भी लखनऊ आकर ओंकार से संपर्क किया। उसने अपनी नौकरी के लिए तीन लाख रुपये ओंकार को दिए। अवध के मुताबिक ओंकार ने कई और लोगों से भी भर्ती के नाम पर रुपया वसूला है।
दिल्ली में रेलवे मुख्यालय ले जाकर चपरासी की भर्ती को कहा
पीड़ित अवध ने बताया कि जैनेंद्र को वह दिल्ली में रेलवे के मुख्यालय ले गया था। वहां उसने अधिकारियों से अपनी जान-पहचान बताते हुए कई लोगों से मिलवाया। बाद में उसने कहा कि भर्ती का मामला फंस गया है इसलिए उसे रेलवे अधिकारियों के बंगले पर चपरासी की नौकरी दिला देगा। जैनेंद्र और अवध ने चपरासी की नौकरी के लिए मना कर दिया।