लखनऊ। मोहनलालगंज तहसील प्रशासन एक हिस्ट्रीशीटर के सामने नतमस्तक है। यही वजह है कि शिकायत के बावजूद सरकारी जमीन पर किए गए कब्जे पर कार्रवाई नहीं की है। अफसर जांच करने का हवाला देकर मामला टाल रहे हैं। यह हाल तब है जब ग्राम प्रधान तहसील, थाने से लेकर डीएम दफ्तर तक शिकायत कर चुकी हैं।
नंदौली गांव के पंचायत भवन के गेट पर हिस्ट्रीशीटर उमेश सिंह ने गुमटी, तख्त आदि रखकर कब्जा कर लिया था। 17 जून को प्रधान इसके खिलाफ धरने पर बैठीं, तब प्रशासन ने उसी वक्त कब्जा हटाया था। हालांकि, सात अगस्त को हिस्ट्रीशीटर ने फिर से उसी जगह पर कब्जा कर गुमटी रख ली। आसपास की जमीन पर भी कब्जा करने की कोशिश है।
प्रधान ने एसडीएम को प्रार्थना पत्र सौंपने के साथ आईजीआरएस पर भी शिकायत दर्ज की। अफसरों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन मामले में अब तक कुछ भी नहीं हुआ है। उमेश सिंह के दोनों भाई भी हिस्ट्रीशीटर हैं। एसडीएम मोहनलालगंज पवन पटेल से संपर्क किया गया, लेकिन वह इस बारे में कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हुए। वह बयान देने में कतराते रहे।
...तो क्या इसलिए दबाव में हैं जिम्मेदार
जून में प्रशासन ने जब कार्रवाई की थी, तब सत्ताधारी पार्टी के एक विधायक, जिलाध्यक्ष व कई और नेता मौके पर पहुंचे थे। ये सभी हिस्ट्रीशीटर की पैवरी में जुटे थे। उनका कहना था कि प्रशासन ने गलत कार्रवाई की है। वे फिर से वहीं पर गुमटी रखवाएंगे। मामला शांत हो गया तो फिर वहीं पर गुमटी रख दी गई। तहसील प्रशासन की खामोशी के पीछे नेताओं का दबाव तो नहीं है? ग्राम प्रधान से लेकर अन्य ग्रामीण भी ये सवाल उठा रहे हैं।
जांच में हुई अवैध कब्जे की पुष्टि
मामले में लेखपाल ने जांच भी की है। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि सरकारी जमीन पर कब्जा हुआ है। इसके बावजूद तहसील प्रशासन कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। जब दोबारा गुमटी रखी गई तो उस दौरान भाजपा के एक पूर्व मंडल प्रभारी भी मौके पर मौजूद थे।