शिक्षा विभाग में सब कुछ मेहरबानियों के सहारे चल रहा है। पेंशन हो या बकाया भुगतान, अधिकारी जब चाहेंगे तभी शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा।
प्रदेश के अधिकतर जिलों की स्थिति काफी खराब है। शिक्षकों के पेंशन संबंधी कागजात तक नहीं भेजे जा रहे हैं, जिससे कि आगे की प्रक्रिया शुरू की जाए।
प्रदेश के 21 जिलों ने तो पेंशन संबंधी कागजात ही नहीं भेजे हैं और कुछ ने भेजे हैं तो वे भी आधे-अधूरे।
वित्त नियंत्रक बेसिक शिक्षा परिषद, इलाहाबाद आरएस पांडेय ने इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिक्षकों के पेंशन संबंधी कागजात भेज दिए जाएं।
शासन ने यह व्यवस्था कर रखी है कि शिक्षकों को रिटायर होने के साथ ही पेंशन या फिर अन्य देयों का भुगतान कर दिया जाए लेकिन, बेसिक शिक्षा अधिकारी इसके बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
इलाहाबाद में पिछले दिनों वित्त नियंत्रक बेसिक शिक्षा परिषद ने पेंशन या अन्य देयों के संबंध में वस्तु स्थिति की जानकारी के लिए अधिकारियों की बैठक बुलाई थी।
इस दौरान पता चला कि अधिकतर जिलों में पेंशन व सेवानिवृत्तिक लाभ देने की स्थिति अच्छी नहीं है।
बलिया, पीलीभीत, संतकबीर नगर, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, झांसी, जालौन, ललितपुर, कानपुर नगर, कन्नौज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, रामपुर, मुजफ्फरनगर, चंदौली, गाजीपुर व सोनभद्र से पेंशन संबंधी कागजात मंडलीय अपर निदेशक कोषागार तथा पेंशन निदेशालय को दिए तक नहीं गए।
श्रावस्ती, अंबेडकरनगर, इटावा, कुशीनगर, संत रविदास नगर तथा आगरा ने काफी संख्या में पेंशन संबंधी कागजात भेज दिए हैं।
वित्त नियंत्रक ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पेंशन संबंधी कागजात समय से भेजे जाएं, ताकि शिक्षकों को समय से इसका लाभ दिया जा सके।