शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग का दावा था कि केंद्रों को सेनेटाइज किया गया है। लेकिन कक्षाओं की साफ-सफाई तक नहीं की गई थी। ऐसा लगा ही नहीं कि कक्षाओं में दवाइयों का छिड़काव किया गया है। राजकीय शिक्षक संघ की महामंत्री छाया शुक्ला ने बताया कि जो दावे किए गए थे, स्थिति उसके उलट दिखाई दी।
कुछ शिक्षक अपना खुद का मास्क लेकर आए थे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्र ने बताया कि संगठन ने चारों केंद्रों का जायजा लिया। साफ-सफाई की घोर कमी है। शासन का आदेश है कि परीक्षक एक मीटर की दूरी पर बैठेंगे, मगर यह संभव नहीं दिख रहा।
कोरोना वायरस के फैलने का खौफ साफ दिख रहा है। कक्षा में केवल 20 शिक्षकों को ही बैठने की अनुमति दी जाए। जब तक व्यवस्था न हो मूल्यांकन स्थगित रहेगा।
बहिष्कार की खबर सुनते ही डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह भी जुबली पहुंचे। उन्होंने शिक्षकों को मनाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। राजकीय शिक्षक संगठन और माध्यमिक शिक्षक संघ के डॉ. आरपी मिश्रा के साथ बैठक की गई, लेकिन वार्ता विफल रही। दोपहर बाद जुबली इंटर कॉलेज से सभी शिक्षक मूल्यांकन का बहिष्कार कर वापस लौट गए।
शिक्षकों ने खुद साफ की डेस्क
जुबिली इंटर कॉलेज, निशातगंज और हुसैनाबाद इंटर कॉलेज की कक्षाओं के डेस्क पर धूल की परत जमी थी। शिक्षकों ने मूल्यांकन शुरू होने से पहले अपने रूमाल से पहले डेस्क को साफ किया। शौचालय और पीने के पानी के स्थान पर भी गंदगी थी। शिक्षकों ने बताया कि करीब दो हफ्ते मूल्यांकन चलना है, इस तरह की स्थिति में कार्य करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।