माध्यमिक शिक्षा परिषद के राजकीय और सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में कार्यरत एलटी (लाइसेंसिंग ऑफ टीचिंग सर्टिफिकेट) के शिक्षकों को 22 साल की सेवा पर प्रोन्नत वेतनमान देने के लिए परास्नातक की अनिवार्यता समाप्त करने की तैयारी है।
निदेशालय ने जिलेवार शिक्षकों का ब्यौरा मांगा गया है जिसके आधार पर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा परिषद से संचालित राजकीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए एलटी शिक्षकों को रखा जाता है।
इन शिक्षकों को रखने की योग्यता बीए व बीएड है। पर जब इन शिक्षकों को 22 साल की संतोषजनक सेवा पर प्रोन्नत वेतनमान देने की बारी आती है तो इसमें पीजी की अनिवार्यता आड़े आ जाती है।
अधिकतर बीए और बीएड के बाद नौकरी में आने पर पीजी नहीं करते। इसके चलते उन्हें समयमान वेतनमान नहीं मिल पाता है। शिक्षक प्रोन्नत वेतनमान की मांग को लेकर काफी समय से आंदोलित हैं।
इसको लेकर कई बार निदेशालय से लेकर शासन तक को ज्ञापन दिया जा चुका है। इसलिए शासन स्तर पर यह समिति बन गई है कि शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान देने के लिए पीजी की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाए।
निदेशालय ने मांगा ब्यौरा
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से एलटी शिक्षकों का ब्यौरा मांगा है। इसमें यह भी पूछा गया है कि साधारण वेतनमान, चयन वेतनमान और प्रोन्नत वेतनमान में कितने शिक्षक हैं।
स्नातक वेतनमान के ऐसे कितने शिक्षक हैं जो पीजी नहीं हैं। उप शिक्षा निदेशक विभा शुक्ला ने इस संबंध में जिलों से जल्द सूचना उपलब्ध कराने को कहा है।
हजारों शिक्षकों का फायदा होगा
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा कहते हैं कि यह विडंबना ही है कि एलटी शिक्षकों को रखने की योग्यता तो बीए व बीएड है, लेकिन जब 22 साल की सेवा के बाद प्रोन्नत वेतनमान का मौका आता है तो पीजी होना अनिवार्य कर दिया जाता है।
सरकार को सोचना चाहिए कि यदि कोई स्नातक करने के बाद शिक्षक बन रहा है तो पीजी की अनिवार्यता कहां तक जायज है। शिक्षक संघ इस संबंध में कई बार उच्च स्तर पर मांग कर चुका है। सरकार यदि यह अनिवार्यता समाप्त कर देती है तो इससे हजारों शिक्षकों को फायदा मिलेगा।