लखनऊ विश्वविद्यालय अपने यहां चल रहे 59 सेल्फ फाइनेंस कोर्सों को लेकर सख्ती करने जा रहा है। विवि स्ववित्तपोषित कोर्सों के संचालन व समन्वयन का जिम्मा अब इसी से जुड़े शिक्षकों को देगा। इसमें विभागाध्यक्षों व डीन के दखल पर लगाम लगाई जाएगी। इसके लिए संविदा शिक्षकों की नियमानुसार तैनाती की जाएगी और इसमें से ही एक को समन्वयक भी बनाया जाएगा।
विवि में चल रहे स्ववित्तपोषित कोर्सों की स्थिति काफी खराब होती जा रही है जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में चल रहे कोर्स उसके लिए आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद हो रहे हैं। इसे देखते हुए विवि प्रशासन ने स्ववित्तपोषित कोर्सों के लिए विस्तृत नियमावली तैयार की है। साथ ही उनका वित्तीय खाता भी अलग किया है। एक तरफ यह तय किया गया है कि जिन कोर्सों में 60 फीसदी से कम प्रवेश होंगे, उस सत्र में वह कोर्स संचालित नहीं किया जाएगा, तो दूसरी तरफ यह भी निर्णय लिया गया है कि इन कोर्सों के लिए प्रति लेक्चर के हिसाब से संविदा शिक्षकों को रखा जाएगा। इसके लिए विवि द्वारा तय विशेषज्ञों का पैनल इनकी नियुक्ति करेगा। इन्हें निर्धारित पैसा प्रति लेक्चर के अनुसार दिया जाएगा और कोर्स बेहतर तरीके से चले इसके संचालन का जिम्मा भी इन्हीं का होगा। इन्हीं शिक्षकों के बीच एक शिक्षक को समन्वयक बनाया जाएगा जो काम अभी तक विभागाध्यक्षों या डीन के पास होता था।
यह समन्वयक कोर्स के टाइम टेबिल बनाने, शिक्षकों के नियमित क्लास लेने, सिलेबस को पूरा कराने, विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने, बेहतर प्लेटमेंट आदि से जुड़ी चीजों की मॉनिटरिंग करेंगे। वह कोर्स के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होंगे। अगर कोर्स फायदे में रहा तो समन्वयक को इंक्रीमेंट दिया जाएगा। अगर कोर्स घाटे में जाएगा तो इसके लिए भी वही जिम्मेदार होंगे। कोर्स की आय का 60 फीसदी उनके वेतन आदि मद में और 40 फीसदी विश्वविद्यालय के अवस्थापना मद के लिए जाएगा।