दरअसल नगर निकायों की सीमा में शामिल होने के बाद संबंधित नगर निकाय इन गांवों में बने मकानों और दुकानों से टैक्स वसूली करने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन सरकार फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं थी।
इसकी वजह यह है कि सरकार का मानना है कि जब इन गावों को शहरी सुविधाएं मुहैया नहीं हो रही हैं, तो इनसे टैक्स लेना उचित नहीं है। इसलिए सरकार ने गांवों का विकास होने तक किसी भी तरह का टैक्स न लेने का फैसला किया है।