सडन कार्डिएक अरेस्ट (एससीए) यानी दिल की धड़कन का अचानक थम जाना, जैसा कि नाम से स्पष्ट है यह एकदम और बिना किसी संकेत के होता है।
ज्यादातर कार्डिएक अरेस्ट, दिल की धड़कन के अनियमित होने का नतीजा होते हैं। इसमें रक्त का प्रवाह मस्तिष्क और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों में रुक जाता है जिसमें हृदय अचानक और अनपेक्षित ढंग से धड़कना बंद कर देता है और इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट की मानें, तो कार्डिएक अरेस्ट होने पर 95 प्रतिशत मरीजों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है। हालांकि लोगों को जागरूक कर इनमें से ज्यादातर मौतों को रोका जा सकता है।
इसी उद्देश्य से अक्तूबर महीने को `सडन कार्डिएक अरेस्ट अवेयरनेस मंथ′ के रूप में मनाया जाता है।
फोर्टिस हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष जैन कहते हैं कि अक्सर सडन कार्डिएक अरेस्ट को लोग दिल का दौरा या हार्ट अटैक समझने की गलती कर देते हैं लेकिन यह अलग है।
इसका समय रहते इलाज न किया जाए, तो आधे घंटे के अंदर पीड़ित व्यक्ति की जान जा सकती है। इसमें ब्लड प्रेशर कम होने से भी हार्ट बीट कम हो जाती है। इलाज में शॉक ट्रीटमेंट दी जाती है, जिसे कार्डियोवर्जन कहते हैं।
हार्ट बीट स्लो होने से तुरंत मरीज को पेसमेकर लगाया जाए, तो भी जान बच सकती है। इसके लक्षणों में नब्ज का टूटना, सीने में जलन, धड़कनों का अचानक तेज या धीमा होना, बेहोशी मुख्य हैं।