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वाह! सस्पेंड प्रोफेसर को बना दिया वीसी

Sun, 26 Jan 2014 10:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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गोरखपुर स्थित पं. दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति को लेकर शनिवार को खासा बखेड़ा खड़ा हो गया।
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पहले तो घोटाले के आरोप में निलंबित प्रोफेसर को कुलपति बना दिया गया, बाद में राज्यपाल को जैसे ही इसकी भनक लगी तो आनन-फानन में आदेश वापस ले लिया गया।

कुलपति की नियुक्ति और फिर हटाने के इस अजब मामले की शिक्षा जगत में खासी चर्चा है। राजभवन के इस फैसले से शिक्षा जगत के लोग हैरत में हैं। कुलाधिपति बीएल जोशी ने शनिवार को दो विश्वविद्यालयों के कुलपति की नियुक्ति के आदेश जारी किए।

आईआईटी नई दिल्ली के प्रो. राजपाल दहिया को राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में समाज शास्त्र विभाग के आचार्य अजीत कुमार पांडेय को पं. दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर का कुलपति नियुक्त किया गया।
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कुलपति बनाए जाने का यह आदेश शुक्रवार की शाम को जारी किया गया। कुछ ही देर बाद राज्यपाल को पता चला कि प्रो. अजीत कुमार पांडेय के खिलाफ घोटाले के कई मामलों में जांच चल रही है।

सूत्रों का कहना है कि फर्जी तरीके से नियुक्तियों सहित कई तरह के घपलों की जांच उनके खिलाफ चल रही है। जांच के दौरान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने उन्हें निलंबित भी कर दिया है।
निलंबित प्रोफेसर को कुलपति नियुक्त किए जाने की खबर फैलते ही राजभवन में भी हड़कंप मच गया। राज्यपाल ने अपने प्रमुख सचिव और अन्य अफसरों को तलब करके मामले की जानकारी ली।

इसके बाद राज्यपाल ने रात को प्रो. पांडेय को कुलपति बनाए जाने संबंधी आदेश तत्काल प्रभाव से वापस लेने का निर्णय किया। राज्यपाल के प्रमुख सचिव राजीव कपूर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रो. पांडेय के खिलाफ जांच चल रही है।

इस वजह से उनको कुलपति बनाए जाने का आदेश वापस लिया गया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति के पद पर फिलहाल नई तैनाती नहीं की गई है।
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चूंकि प्रो. पांडेय ने कार्यभार नहीं लिया था, इसलिए नई तैनाती तक प्रो. आरपी यादव कार्यवाहक कुलपति बने रहेंगे। प्रो. राजपाल दहिया की नियुक्ति का आदेश यथावत रखा गया है।
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