सरकार्यवाह के प्रवास कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अभी यह तय नहीं है कि वह सभी दिन लखनऊ में ही रहेंगे या अगल-बगल के किसी जिले में जाकर भी संघ का कामकाज देखेंगे। जोशी ठीक एक महीने बाद फिर लखनऊ आ रहे हैं।
इससे पहले अक्तूबर में केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक के सिलसिले में आए थे। वह लगभग 11 दिन लखनऊ में रुककर 22 अक्तूबर को वापस गए थे। उनका यह दौरा वैसे तो संघ के नियमित कार्यक्रम का हिस्सा है पर, संयोग से यह दौरा केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद हो रहा है।
इसलिए स्वाभाविक रूप से केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में यूपी के संदर्भ में हुई चर्चा और उससे निकले निष्कर्ष विचार-विमर्श का हिस्सा रहेंगे ही।
बैठक में इन मुद्दों पर होगी चर्चा
जानकारी के मुताबिक एक दिन जिला, एक दिन विभाग (तीन से पांच जिलों को मिलाकर) और एक दिन प्रांत के संघ पदाधिकारियों की बैठक होगी। एक दिन सिर्फ प्रचारकों की बैठक होगी। जोशी का संघ से संबंधित सभी संगठनों में काम करने वाले पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं और प्रचारकों के साथ बातचीत का कार्यक्रम है।
बताया जाता है कि विचार-विमर्श के प्रमुख बिंदु शाखाओं का विस्तार, उनकी स्थिति और नई शाखाओं की संभावनाएं होंगी। इस दौरान पढ़े-लिखे नौजवानों को संघ से जोड़ने के उपाय, धर्मान्तरण व गोवध की चुनौतियां, सेवा व शिक्षा कार्यों में विस्तार, नदियों की सफाई तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा व कार्ययोजना बनाना प्रस्तावित है।
इन बातों की भी होगी समीक्षा: इस बात की भी समीक्षा होगी कि अलग-अलग क्षेत्रों में संघ परिवार के संगठनों की खासतौर से भाजपा की पकड़ व पहुंच कैसी है? सामाजिक समीकरणों के आधार पर संघ परिवार के संगठनों की शक्ति कैसी है?
साथ ही उन शिकायतों की भी समीक्षा हो सकती है जिनमें लगातार यह बात उठ रही है कि केंद्र में सरकार बनने के बाद भगवा टोली से जुड़ने वालों की होड़ मची हुई है। इनमें तमाम ऐसे लोग हैं जो सियासी हवा के साथ-साथ चलते हैं।
तैयार होगा कार्ययोजना का खाका
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी ‘भैया जी’ मंगलवार की सुबह राजधानी पहुंच रहे हैं। वह यहां चार-पांच दिन रहेंगे। इस दौरान उनका मुख्य ध्यान संगठनात्मक कामकाज के विस्तार और उसकी समीक्षा पर रहेगा।
हालांकि, इस तरह की बैठकों में राजनीतिक विषय पर चर्चा नहीं होती लेकिन प्रकारांतर से बातचीत में सूबे की राजनीतिक परिस्थितियां और सामने खड़ी चुनौतियां विचार-विमर्श का हिस्सा बने बिना नहीं रहेंगी।
कारण, भले ही 2017 का विधानसभा चुनाव भाजपा को लड़ना है लेकिन सब जानते हैं कि भाजपा को यूपी की सत्ता दिलाना भगवा टोली के लिए भी कितना महत्वपूर्ण है।
इसलिए जोशी के इस प्रवास पर कहीं न कहीं सूबे की राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों पर चर्चा जरूर होगी। साथ ही कार्ययोजना का खाका भी खींचा जाएगा।