फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोर्ट के फैसले के बाद ऐसे खुली शिक्षामित्रों की राह

Wed, 08 Jul 2015 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट से शिक्षा मित्रों को बिना टीईटी शिक्षक बनाए जाने को अवैध करार देने के साथ प्रक्रिया रोकने संबंधी आदेश आने के दूसरे दिन मंगलवार को बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी मथापच्ची में जुट गए।
विज्ञापन


शिक्षा अधिकारी अब इस कोशिश में हैं कि कैसे इसकी काट निकाली जाए, जिससे सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल सके। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने बेसिक शिक्षा निदेशक डीबी शर्मा के साथ अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की।

इसमें उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली के उस संशोधन पर चर्चा की गई, जिसमें शिक्षा मित्रों को शिक्षक बनाने का प्रावधान किया गया था।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद परिषदीय स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदेश में 27 जुलाई 2011 को उत्तर प्रदेश निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली जारी करते हुए टीईटी का यह प्रावधान किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे निकल सकता है शिक्षामित्रों के शिक्षक बनने का रास्ता

इसके बाद भी शिक्षा मित्रों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय बीटीसी का प्रशिक्षण देकर बिना टीईटी शिक्षक बनाए जाने का निर्णय कर लिया गया।

प्रदेश में अब तक 1,35,826 शिक्षा मित्रों को शिक्षक बनाया जा चुका है। सचिव बेसिक शिक्षा ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चर्चा की। बेसिक शिक्षा निदेशक से जानकारी प्राप्त की गई कि शिक्षा मित्रों को शिक्षक बनाने के लिए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली में क्या व्यवस्था की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में इसके आधार पर कितना बचाव हो सकता है। इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी नहीं मिला है,लेकिन आगे की प्रक्रिया रोक दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में 27जुलाई को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष रखा जाएगा।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें