इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि लड़की अगर अपने माता पिता के साथ नहीं रहना चाहती तो उसे शेल्टर होम में भेजने का आदेश सही है। इस आदेश के बाद हाईकोर्ट ने शादी को शून्य करार दे दिया था। लड़की के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि हाईकोर्ट इस तथ्य को मानने में विफल रहा है कि उसका निकाह मुस्लिम कानून के अनुसार हुआ है।
याचिका में लड़की ने अपने जीने, धार्मिक मान्यताओं का पालन करने और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा के लिए दलील दी है कि वह एक युवक से प्रेम करती है और इस साल जून में मुस्लिम कानून के अनुसार उनका निकाह हो चुका है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को है जहां गृह विभाग के सचिव को अपना जवाब दाखिल करना है।
इससे पहले सुनवाई के दौरान जस्टिस एनवी रमन्ना और अजय रस्तोगी की पीठ के सामने राज्य सरकार के वकील ने जवाब पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- मुख्य सचिव अदालत में हाजिर हों। इसके बाद ही उन्हें मामले की गंभीरता समझ आएगी। अदालत ने कहा कि इस मामले में जवाब दाखिल करने का समय दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार के संबंधित विभाग ने वकील को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए।