राज्य सरकार गुरुवार से शुरू हो रहे विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में 9 दिसंबर को विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश करेगी।
इसमें सरकार अपनी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में आने वाली अड़चन को दूर करने का रास्ता बनाने जा रही है।
संकेत है कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे व मेट्रो के लिए जहां बजट प्रावधान की तैयारी है।
वहीं, गन्ना समितियों को दिए जाने वाले कमीशन के लिए सरकार अनुपूरक में प्रावधान कर सकती है।
वित्त विभाग ने मंगलवार को अनुपूरक बजट के लिए प्रस्तावों को जुटाने और उसे अंतिम रूप में देने की कार्यवाही की।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे व राजधानी की मेट्रो परियोजना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मगर एक्सप्रेस-वे के लिए बिड में निवेशकों ने रुचि नहीं दिखाई।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि एक्सप्रेस-वे के लिए निवेशक नही आए इसलिए सरकार दूसरे विकल्पों पर विचार कर रही है।
संकेत है कि सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए अनुपूरक बजट में किसी फॉर्मूले पर पैसे की व्यवस्था करने जा रही है।
इसके अलावा मेट्रो प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए बजट प्रावधान किया जाना है। अनुपूरक में इसके लिए भी पैसे की व्यवस्था हो सकती है।
इसके अलावा प्रदेश सरकार ने शुगर मिल मालिकों के दबाव में उन्हें गन्ना समितियों को देने वाले कमीशन से मुक्ति दे दी थी।
शुगर मिलें समितियों को करीब 500 करोड़ रुपये का भुगतान करती आई हैं। सरकार ने मिलों की ओर से समितियों को यह कमीशन अपने स्तर पर देने की बात कही थी।
समझा जा रहा है कि अनुपूरक बजट में समितियों के कमीशन के लिए भी पैसे की व्यवस्था होगी। सरकार ने आकस्मिकता निधि से मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों को 90 करोड़ रुपये मुआवजे में दिया था।
समझा जा रहा है कि सरकार अनुपूरक में इस पैसे की प्रतिपूर्ति का प्रावधान करेगी। इसके अलावा सड़कों के सुधार व सिंचाई परियोजनाओं के लिए भी अनुपूरक में प्रावधान हो सकता है। माना जा रहा है कि अनुपूरक प्रस्ताव ढाई हजार करोड़ से अधिक का हो सकता है।