नोएडा सुपरटेक लि. और नोएडा अथॉरिटी की मिलीभगत से किए गए घपले में एसआईटी की रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। यह केस वरिष्ठ प्रबंधक नियोजन, नोएडा की तहरीर पर दर्ज किया गया है। इसमें नोएडा अथॉरिटी के पूर्व सीईओ समेत 30 लोगों को नामजद किया गया है। इनमें अथॉरिटी के तत्कालीन और सुपरटेक के अधिकारी शामिल हैं।
एफआईआर में एसआईटी की जांच रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि घपले में नोएडा अथॉरिटी और सुपरटेक के अधिकारियों की मिलीभगत के सुबूत मिले हैं। जांच में पता चला है कि सुपरटेक ने नियमों की अनदेखी की है। वहीं, नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों ने बिल्डर को अनुचित आर्थिक लाभ दिलाने के लिए नियमों के विपरीत काम किया। सुपरटेक की कमियों को नजरअंदाज करते हुए अवैधानिक निर्माण को जारी रखने में सहयोग दिया। गौरतलब है कि एसआईटी ने इस मामले की विस्तृत जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा एफआईआर दर्ज कराकर कराए जाने की सिफारिश की थी। इसके बाद विजिलेंस ने यह एफआईआर कराई है।
इनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर
एफआईआर में पूर्व सीईओ मोहिंदर सिंह व एसके द्विवेदी, एडिशनल सीईओ आरपी अरोड़ा व पीएन बाथम, ओएसडी यशपाल सिंह, एके मिश्रा (सेवानिवृत्त नगर नियोजक), राजपाल कौशिक (सेवानिवृत्त वरिष्ठ नगर नियोजक), त्रिभुवन सिंह (सेवानिवृत्त मुख्य वास्तुविद् नियोजक), शैलेंद्र कैरे (सेवा निवृत उप महाप्रबंधक ग्रुप हाउसिंग), बाबूराम (सेवानिवृत्त परियोजना अधिकारी), ऋतुराज व्यास (सहायक नगर नियोजक, वर्तमान में यमुना प्राधिकरण में प्रभारी महाप्रबंधक) और टीएन पटेल (सेवा निवृत प्लानिंग असिस्टेंट) नामजद किए गए हैं। इनके अलावा वीए देवपुजारी (सेवानिवृत्त उप मुख्य वास्तुविद् नियोजक), अनीता प्लानिंग असिस्टेंट, एनके कपूर (सेवानिवृत्त एसोसिएट आर्किटेक्ट), मुकेश गोयल नियोजक सहायक, वर्तमान में प्रबंधक नियोजक के पद गीडा में तैनात, प्रवीण श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त सहायक वास्तुविद्), ज्ञानचंद (सेवानिवृत्त विधि अधिकारी), राजेश कुमार (सेवानिवृत्त विधि अधिकारी), विमला सिंह सहयुक्त नगर नियोजक, विपिन गौड़ (सेवानिवृत्त महाप्रबंधक), एमसी त्यागी (सेवानिवृत्त परियोजना अभियंता), केके पांडे मुख्य परियोजना अभियंता, एसी सिंह (सेवानिवृत्त वित्त नियंत्रक) के भी नाम हैं। वहीं, एफआईआर में सुपरटेक के अधिकारी आरके अरोड़ा, संगीता अरोड़ा, अनिल शर्मा, विकास कंसल (सभी निदेशक), आर्किटेक्ट दीपक मेहता व नवदीप भी नामजद हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित की गई थी एसआईटी
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक लि. को आवंटित ग्रुप हाउसिंग भूखंड पर बने अवैध टावर संख्या टी-16 और टी-17 को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। साथ ही नोएडा अथॉरिटी के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए कहा था। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आईआईडीसी संजीव मित्तल की अध्यक्षता में जिम्मेदारी तय करने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने 3 अक्तूबर को शासन को रिपोर्ट सौंप दी थी।