ऐशबाग औद्योगिक क्षेत्र की करीब एक हजार एकड़ भूमि को बेच एलडीए मालामाल होने की तैयारी में है। लीज की इस भूमि का नवीनीकरण 19 साल बाद भी नहीं हुआ।
प्राधिकरण कर्मचारी यूनियन ने इस मसले को जोरशोर से उठाया है। यूनियन ने साफ किया है कि इस भूमि के लीज रिन्यूअल करने की जगह पट्टाधारकों को यह जमीन डीएम सर्किल रेट पर बेच दी जाए।
उनको फ्री होल्ड कर के प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाए। उपाध्यक्ष ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने के लिए कहा है।
दूसरी ओर शासन ने भी औद्योगिक पट्टों की भूमि के संबंध में प्राधिकरण से रिपोर्ट तलब की है। माना जा रहा है कि ऐशबाग औद्योगिक क्षेत्र की लीज रिन्यूअल के संबंध में अब महत्वपूर्ण फैसला बहुत जल्द ही किया जाएगा।
ऐशबाग में औद्योगिक क्षेत्र में करीब एक हजार एकड़ भूमि है। यहां दर्जनों की संख्या में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इनमें से अधिकांश बंद हैं और कुछ अभी चालू हैं। अंग्रेजों के समय में एलडीए की जगह इंप्रूवमेंट ट्रस्ट काम करता था।
ट्रस्ट ने ही पट्टाधारकों को यह भूमि 1904 में 90 साल की लीज पर दी थी। इस लीज का रिन्यूअल साल 1994 में किया जाना था।
19 साल बीतने के बावजूद ऐशबाग में लीज रिन्यूअल प्रक्रिया को प्राधिकरण ने शुरू ही नहीं किया। आखिरकार कर्मचारी यूनियन के याद दिलाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर उठा है।
पल में दूर होगा आर्थिक संकट
यूनियन के अध्यक्ष एसपी सिंह,संरक्षक अवधेश प्रताप सिंह और महामंत्री दिनेश शुक्ल ने उपाध्यक्ष एमपी अग्रवाल से मुलाकात कर कहा कि यह भूमि बहुत अधिक है।
लीज रिन्यूअल करने के स्थान पर इस भूमि को बेच दिया जाए। इसके लिए अगर डीएम सर्किल रेट और फ्री होल्ड चार्ज भी लिया जाए तो प्राधिकरण को कम से कम तीन हजार करोड़ रुपये की आय होगी।
यह आय एलडीए के डेढ़ साल के बजट के बराबर होगी। ऐसे में अनेक विकास कार्यों के आड़े आने वाले आर्थिक संकट झटके में दूर हो सकेंगे। उपाध्यक्ष एमपी अग्रवाल ने इस पूरे मसले को परखने का आदेश संबंधित अधिकारियों को दिया है।