वीकेंड था। इसलिए भीड़ अधिक थी। पुलिस भी हर वीकेंड पर सक्रिय रहती है। शनिवार को भी ऐसा रहा। एसीपी, इंस्पेक्टर समेत करीब 30-40 पुलिसकर्मी पूरी बिल्डिंग में तैनात थे। वे प्रयास कर रहे थे कि किसी तरह का विवाद न हो। ग्राउंड से लेकर टॉप फ्लोर तक अफसर चक्कर लगा रहे थे। पर, इस सबका कोई खास असर नहीं दिख रहा था। बार के बाहर नशे में धुत युवक-युवतियां गाली-गलौज कर रहे थे। महिला पुलिसकर्मी किसी तरह से उन सबको वहां से हटा रही थीं।
रात करीब 11 बजे पुलिस ने म्यूजिक बंद करवा दिया। करीब 12 बजे मुख्य गेट से एंट्री भी बंद कर दी गई। बार में जो लोग थे, वे पार्टी करके आहिस्ता-आहिस्ता वापस लौटना शुरू हो चुके थे। मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल मौजूद था। तभी तीन चार लोग बाहर निकले। इसमें से एक युवक का सिर फटा हुआ था। वह खून से लथपथ था। युवक के साथ मौजूद लोग उसे अस्पताल ले गए। पता चला कि वाइड क्लब में हुए विवाद के दौरान दूसरे पक्ष ने उसके सिर पर बोतल मार दी।
समिट बिल्डिंग में शाम सात बजे से भीड़ बढ़नी शुरू हो जाती है। रात एक बजे तक पार्टी चलती है। वीकेंड पर आम दिनों से दोगुनी भीड़ रहती है। इसलिए इन दोनों दिनों में अधिक पुलिस बल की तैनाती की जाती है। रात दो-ढाई बजे तक पुलिसकर्मी यहां जमे रहते हैं, जिससे कोई विवाद न हो। इसके बाद भी घटनाएं होती रहती हैं। कई विवाद तो बार के भीतर होते हैं। बार मालिक व कर्मचारी मिलकर उन मामलों को दबा देते हैं। पुलिस तक मामला पहुंचता ही नहीं।