लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ योद्धा संन्यासी हैं। उन्होंने बृहस्पतिवार को लखनऊ के विधानभवन में भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आपको जो मुख्यमंत्री मिला है, उसे योद्धा संन्यासी की तरह काम करना पड़ रहा है और आगे भी करना पड़ेगा।
संन्यास का मतलब सब कुछ छोड़ना नहीं है। संन्यास का मतलब है इच्छाओं का संन्यास। कर्म से कभी संन्यास नहीं होता। इसे समझने वाले आदित्यनाथ सीएम हैं। सभी सदस्यों को यह समझना होगा कि प्रदेश के लोगों ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरना सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों को सीख दी कि चुनाव जीत जाने पर वे नेता बन जाने की गलतफहमी न पालें। जनता मार्गदर्शन के लिए नहीं, जन आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए प्रतिनिधि चुनती है। ऐसे में विधायक जनप्रतिनिधि बनें, नेता नहीं।
सुमित्रा महाजन ने इस संबंध में अपना ही उदाहरण किया। कहा, 1989 में इंदौर से पहली बार भाजपा की सांसद चुने जाने पर मुझे भी नेता बन जाने की गलतफहमी हुई थी, लेकिन बड़े नेताओं ने ठोक बजाकर ठीक किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए।
गलत काम के लिए ‘न’ बोलना सीखें विधायक
लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन
- फोटो : amar ujala
सुमित्रा महाजन ने नवनिर्वाचित विधायकों को सीख दी कि वे ‘न’ बोलना सीखें। उन्होंने विधायकों को सूत्र दिया कि वे सही जगह पर ‘न’ बोलना भी सीखें। यह नकारात्मक सोच नहीं है। कोई अतिक्रमण रुकवाने की सिफारिश करेगा तो कोई अपराधी को छुड़वाने की।
जो काम नहीं हो सकता, जो आपको उचित नहीं लगता, उसके लिए झूठा आश्वासन मत दीजिए। ऐसे ही यदि किसी मामले में प्रयास करने की बात कही है तो यह प्रयास दिखना भी चाहिए। इसमें संकोच किया तो यशस्वी नहीं बन सकते।
उन्होंने कहा, जनप्रतिनिधियों के मन में संसदीय संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखने का भाव रहना चाहिए। उनमें अच्छा भाषण देने के साथ ही भाषण सुनने की आदत भी होनी चाहिए। साहित्यिक कार्यक्रमों, सिनेमा में जाना चाहिए। साहित्य, नाटक व संगीत अच्छा मनुष्य बनाते हैं। प्रजातंत्र में अच्छे इंसान ही अच्छे जनप्रतिनिधि होते हैं। 1952 में संगीत नाटक अकादमी की स्थापना संसद के सेंट्रल हॉल में डॉ. राजेंद्र प्रसाद और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की थी।
विधायकों को खुद सीखना होगा, कैसे करना है काम
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लगातार आठवीं बार की सांसद सुमित्रा महाजन ने विधायकों से कहा कि वे चार माह बाद अपने आप से पूछें कि उन्होंने विधानसभा नियमावली देखी है, उनकी समझ में कितना आया है, क्या संविधान के कुछ पन्ने उन्होंने पढ़े हैं? अब विधायकों को खुद सीखना होगा कि कैसे काम करें।
किसी खास क्षेत्र में बनाएं इमेज
सुमित्रा महाजन ने विधायकों को सलाह दी कि वे किसी न किसी खास विषय या क्षेत्र में अपनी छवि बनाएं। किसी एक विषय पर तैयारी करके बोलने से आप पर विश्वास बढ़ता है। कहा, जब मैं पहली बार संसद में रेलवे पर बोली तो लालकृष्ण आडवाणी ने विशेषज्ञ को बुलाकर मेरी मदद कराई।
हमने लोकसभा में स्पीकर्स रिसर्च इंस्टीट्यूट शुरू किया है। इसमें विभिन्न विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। प्रश्नोत्तर कराया जाता है। इससे लोकसभा में कृषि, सूखा और बाढ़ जैसे परंपरागत विषयों पर हुई बहस एमएसपी बढ़ाने, कर्जमुक्ति और सरकार की आलोचना तक सीमित नहीं रही, चर्चा बहुत सकारात्मक रही।
आपके कोयल दिखने का समय शुरू
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कौआ और कोयल दोनों काले होते हैं। वसंत का मौसम आता है तो कुहू से पता लग जाता है कि कोयल कौन सी है। जनप्रतिनिधियों के कोयल दिखने का समय शुरू हो गया है।