चुनावी साल गन्ना किसानों पर बहुत भारी पड़ने जा रहा है। एक तरफ महंगाई की मार और दूसरी तरफ भुगतान को तरसते किसान।
सबसे बड़ी नकदी फसल गन्ना ही किसानों की बदहाली का सबब बन रही है। वे मिलों को गन्ना आपूर्ति कर रहे हैं लेकिन भुगतान नहीं मिल रहा है।
कुछ माह बाद सरकारें जब लोकसभा चुनाव में व्यस्त होंगी तब किसानों का दर्द शायद ही उन्हें दिखे। चालू पेराई सत्र का बकाया गन्ना मूल्य करीब पांच हजार करोड़ पहुंच चुका है।
पिछले साल का 534 करोड़ गन्ना मूल्य और 556 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान अभी नहीं हुआ है। प्रदेश में गन्ना 27 हजार करोड़ से ज्यादा मूल्य की नकदी फसल है।
22 हजार करोड़ से ज्यादा गन्ना तो किसान चीनी मिलों को ही सप्लाई करते हैं। करीब 40 जिलों में गन्ना अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। पिछले साल किसानों को चीनी मिलों से भुगतान में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पिछले साल के 534 करोड़ रुपये अब भी नहीं मिले हैं। ब्याज अलग है। इसी तरह चालू सीजन में बकाया गन्ना मूल्य लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रमुख सचिव गन्ना एवं चीनी उद्योग राहुल भटनागर ने किसानों को प्राथमिकता के आधार पर बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
उनके मुताबिक 11 फरवरी तक चालू सत्र का बकाया 4750 करोड़ रुपये पहुंच गया है। मौजूदा सीजन में किसानों ने मिलों को अभी तक 9567 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना दिया है।
14 दिन बाद दी जाने वाली कुल देय राशि 7401 करोड़ के सापेक्ष किसानों को 2651 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।