इसके दस महीने बाद अगस्त 18 में किशोरी को बरामद करके डॉक्टरी मुआयना व मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान दर्ज कराए गए। इसमें उसने महेश पर आरोप लगाया। पुलिस ने 23 सितंबर 18 को महेश को जेल भेजा था। बेटे की रिहाई के लिए थाने, चौकी व कचहरी के चक्कर काट रहे जौहरी प्रसाद ने कुछ दिनों पहले दरोगा धीरज कुमार से संपर्क किया।
उसने विवेचना में मुकदमा हल्का करके महेश को रिहा कराने में मदद का आश्वासन देकर रिश्वत की मांग करने लगा। इस पर जौहरी प्रसाद ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की थी। संगठन के पुलिस उपाधीक्षक ने बताया कि घूस लेते पकड़े गए धीरज कुमार को आननफानन में महानगर कोतवाली ले जाकर अभियोग दर्ज कराने के साथ उसे पुलिस के हवाले किया गया।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा काकोरी थाने की अंधे की चौकी के प्रभारी धीरज कुमार को घूस लेते पकड़े जाने का अभियोग दर्ज कराने के साथ पुलिस अफसरों को जानकारी दी। पता चला कि अंधे की चौकी पर साल भर से कोई प्रभारी तैनात ही नहीं है। वहां दो बीट प्रभारी के रूप में दरोगाओं की तैनाती है।
इनमें एक बीट पर धीरज कुमार तैनात था। वह खुद को चौकी इंचार्ज बताता था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने बताया कि गोरखपुर के गगहा थाने के गांव सेनुआपार निवासी धीरज कुमार 1998 बैच का सिपाही था। वह 2016 में प्रोन्नत होकर दरोगा बना था और 17 फरवरी 2017 से काकोरी थाने पर उसकी तैनाती थी।