90 वार्ड वाले वाराणसी शहर में कुल 24472 वेंडरों के अलावा 25 वेंडिंग जोन व 22 नॉन वेडिंग जोन चिह्नित किए गए हैं। इसी तरह 80 वार्ड वाले इलाहाबाद में भी 13809 वेंडरों के अलावा 25 वेंडिंग जोन व 10 नॉन वेडिंग जोन चिह्नित हैं। जिनका मॉडल के तौर पर विकास जाएगा।
इन शहरों के वेडिंग जोन में पथ विक्रेताओं को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए सबसे पहले उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा वेंडिंग जोन में पक्का फर्श, कूड़ा प्रबंधन, शौचालय, पेयजल और पार्किंग समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। दोनों शहरों के वेंडिंग जोन को विकसित करने के बाद अन्य 28 नगर निकायों में चिह्नित वेंडिग जोन का भी इसी मॉडल पर विकास किया जाएगा।
वैसे तो प्रदेश केसभी शहरों के लिए वेडिंग जोन चिह्नित किए जाने हैं, लेकिन सबसे पहले चरण में इलाहाबाद व वाराणसी केअलावा राजधानी लखनऊ समेत अन्य 28 शहरों में वेंडिग जोन के लिए ‘विस्तृत क्रियान्वयन प्लान’ तैयार किया जाएगा। इनमें कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, गोरखपुर, अलीगढ़, फिरोजाबाद, झांसी, सहारनपुर, बरेली, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, मुजफ्फरनगर, मऊ, लोनी, बुलंदशहर, हापुड़, उन्नाव, मिर्जापुर, हरदोई, फतेहपुर, उरई, अमरोहा, शाहजहांपुर, जौनपुर व संभल नगर निकाय शामिल हैं।
‘इलाहाबाद व वाराणसी को मॉडल शहर के रूप में चयनित के बाद वेंडिंग जोन के विकास के लिए तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया है। जल्द ही इसी मॉडल को अन्य शहरों में भी लागू किया जाए। ताकि शहरों के फुटपाथ विक्रेताओं को सहूलित दी जा सके।’ उमेश प्रताप सिंह, निदेशक, सूडा