डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रम मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (एमपीओ) में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है। प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं के लिए इस सत्र से पढ़ाई की विधि भी आसान होगी।
इसका उद्देश्य है कि छात्र कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक्स) और सहायक उपकरणों (ऑर्थोटिक्स) के डिजाइन और सरल फिटिंग के बारे आसानी से समझ सकें और पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके लिए रोजगार की राह आसान हो सके।
ये भी पढ़े- Monsoon in UP: यूपी में मानसून ने दी दस्तक... तपिश और लू से मिलेगी राहत, होगी झमाझम बारिश
बता दें कि हाल ही में बोर्ड ऑफ स्टडी की ओर से हुई बैठक में ये निर्णय लिया गया था कि विश्वविद्यालय इस कोर्स में छात्रों का प्रवेश स्वयं की मेरिट पर लेगा। जबकि इससे पहले प्रवेश के लिए किसी राष्ट्रीय एजेंसी से परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। अब आवेदन भी शुरू हो गए हैं। ये पाठ्यक्रम पुनर्वास के अलावा अन्य किसी विश्वविद्यालय में संचालित नहीं होता है।
इस कोर्स से छात्रों को होंगे ये फायदे
इस पाठयक्रम के माध्यम से सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रोस्थेटिस्ट और ऑर्थोटिस्ट के रूप में काम करने का अवसर मिल सकता है। अस्पतालों में विशेष सेवाएं प्रदान करने के लिए अवसर मिल सकता है। साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ सहयोगी के तौर पर भी समय-समय पर होने वाली भर्ती के माध्यम से भी छात्रों को रोजगार मिल सकता है। इसके अलावा अपना खुद का प्रोस्थेटिक और ऑर्थोटिक क्लीनिक स्थापित करने में आसानी हो सकेगी।
ये भी पढ़े- Lucknow: पूर्व प्रधान के भतीजों के बंद घर में चोरी, बदमाश नकदी और डेढ़ करोड़ के जेवरात चुरा ले गए
28 तक होंगे ओवदन
विवि में 28 जून तक स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। इसी में एमपीओ, सीसीसीई, पीजीडीआईएम, पीजीडीएवीटी, डी फार्मा में मेरिट के आधार पर प्रवेश लिए जाऐंगे। एमपीओ को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन बैठक के बाद अब इसमें भी आवेदन शुरू हो गए हैं।
शोध को मिलेगा बढ़ावा :
पुनर्वास विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. यशवंत वीरोदय के अनुसार विश्वविद्यालय ने निर्णय लिया है कि विश्वविद्यालय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की ओर से आगे 66 बढ़ रहा है। कोर्स में पढ़ाई की विधि सरल हो छात्र आसानी से समझ सके इस पर जोर दिया जा रहा है। प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स विभाग के तहत, छात्रों को कृत्रिम अंगों (प्रोस्थेटिक्स) और सहायक उपकरणों (ऑर्थोटिक्स) के डिजाइन, निर्माण, और फिटिंग के बारे पढ़ाई के साथ-साथ शोध को भी बढ़ावा दिया जाए। ताकि नए-नए डिजाइन तैयार करने में आसानी हो।