प्रो. सिंह ने कहा कि विवि नए सत्र के प्रवेश के साथ ही शोध प्रवेश की भी प्रक्रिया आयोजित करेगा। शोध को बढ़ावा देने के लिए कुछ पोस्ट डॉक्टोरल फेलो भी तीन साल के लिए तैनात करेंगे। उन्हें यूजीसी-सीएसआईआर के नियमों के तहत वेतन देंगे। शिक्षकों को विभिन्न प्रोजेक्ट आदि के लिए ट्रेंड करने को कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाएगा। दिव्यांगों की सुविधा के लिए एक दर्जन से अधिक अस्थायी साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर रखे गए हैं। रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह, वित्त अधिकारी आबिद अली अंसारी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमित कुमार राय, पीआरओ प्रो. अश्वनी कुमार दुबे उपस्थित थे।
कुलपति ने कहा कि हमारा फोकस दिव्यांगों के लिए बेहतर सुविधा देने और उनके लिए नए अविष्कार करने पर है। हम जल्द ही एकेटीयू व केजीएमयू के साथ एमओयू करेंगे। राज्यपाल की पहल पर विवि ने टीबी प्रभावित बच्चों को गोद लिया है। इस दिशा में केजीएमयू के साथ मिलकर आगे भी काम करेंगे और गांवों में भी जाएंगे।
डेफ कॉलेज भी शुरू होगा
रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह ने बताया कि ब्रेल प्रेस के टेंडर की औपचारिकता पूरी कर ई-टेंडर जारी कर दिया गया है। नए सत्र में यह शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि डेफ कॉलेज की बाधाएं भी दूर हो गई हैं। जुलाई से शुरू होने वाले नए सत्र में इसे भी शुरू करके प्रवेश लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विवि ने अपने यहां पुरानी पेंशन योजना को प्रभावी कराया व प्रो. प्रेम मोहन को सेवानिवृत्त होने के बाद इसका लाभ दिलाया। इस योजना का लाभ देने वाला 2008 के बाद स्थापित राजधानी का यह पहला विश्वविद्यालय है।