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पढ़ें, कैसे रैगिंग कर रहे हैं इस मेडिकल कॉलेज के ‘एमबीबीएस’

Sat, 05 Sep 2015 11:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
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‘अबे इतने बड़े बाल क्यों रखे हैं, डॉक्टर बनने आया है या हीरो बनने। बाल छोटे करा ले, तू हां तू ही बे, बहुत अकड़ रहा है, एक मिनट में तेरी अकड़ उतार देंगे। हां एक बात और नाइंटी (किसी सीनियर को देखते ही 90 डिग्री झुककर सलामी देना) मारना सीख ले।
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बेटा, अभी तो शुरुआत है, आगे आगे देखता जा। जैसा हम कह रहे हैं वही कर। रोजाना न डॉक्टर आएंगे और न ही गार्ड, सब दिखावे का होता है, हमें भी लगता था कि खूब सुरक्षा में हैं।

सीनियरों ने बहुत सबक सिखाया है। हम नहीं रैगिंग करेंगे तो तू अगले साल कैसे रैगिंग कर पाएगा।’ जी हां आप सही समझे यह रैगिंग का सीन है। पर गौर करने वाली बात यह है कि यह दृश्य कहीं और का नहीं बल्कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कैंपस का है।
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भारीभरकम एंटी रैगिंग कमेटी, गार्डों की निगहबानी के बावजूद एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के स्टूडेंटों की रैगिंग शुरू हो गई है। इससे फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट सहमे हुए हैं। बीएच पांच हॉस्टल से निकलने के बाद और फिर हॉस्टल के गेट में आने से पहले स्टूडेंटों की सांस अटकी रह रही है। कब कौन सीनियर क्या कह दे।
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चल रही थी रैगिंग, चुप थे गार्ड

शुक्रवार को क्लास पहुंचे स्टूडेंट्स से रास्ते में कुछ सीनियरों ने रैगिंग की। स्टूडेंट रास्ते में चल रहे थे और सीनियर उनको टाइट करते जा रहे थे। बगल में चल रहे गार्ड चुप्पी साधे थे, उनकी हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि क्या करें।

अपर निदेशक प्रशासन के दौरे के कारण ज्यादातर सीनियर डॉक्टर हैलट की तरफ थे इसलिए सीनियर स्टूडेंटों को रैगिंग का मौका मिल गया।

उधर प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार का दावा है कि कॉलेज में रैगिंग नहीं हो रही है। वह खुद मॉनीटरिंग कर रहे हैं। स्टूडेंटों से बात की जाएगी। यदि उन्हें रास्ते में परेशान करने की जानकारी मिलेगी तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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