पुरानी पेंशन योजना लागू हो। न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये प्रतिमाह हो। रोजगार के मौके बढ़ें और सभी विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्ति हो। समान काम के लिए समान वेतन मिले और ठेका प्रथा खत्म हो। संविदा/आउटसोर्सिग के कर्मचारियों को नियमित करें। ट्रांसपोर्ट व सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगे। बैंक, बीमा व रेलवे में विदेशी पूंजी निवेश रोकें। बिजली उत्पादन व वितरण कंपनियों का एकीकरण कर उप्र. बिजली परिषद निगम बने। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन और इलेक्ट्रिसिटी एमेंडमेंट बिल 2018 वापस हो। स्कीम वर्कर्स को 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के आधार पर कर्मचारी घोषित कर न्यूनतम वेतन दिया जाए।