लखनऊ। पुरुषों में बांझपन की समस्या भारत ही नहीं, पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रही है। युवा अपने कॅरिअर के चक्कर में देरी से शादी कर रहे हैं। तनाव और जीवनशैली में बदलाव भी बांझपन का प्रमुख कारण है। देरी से इलाज में परिणाम और अधिक खराब हो जाते हैं। इससे बच्चे पैदा होने में समस्या होती है। यह जानकारी वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. गीता खन्ना ने रविवार को दी।
हजरतगंज के एक होटल में अजंत होप सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रीप्रोडक्शन एंड रिसर्च, इंडियन फर्टिलिटी सोसायटी (आईएफएस) की ओर से हुए इंटरनेशनल होप सीएमई में डॉ. गीता ने कहा कि प्रिजर्वेटिव और पैकेजिंग युक्त भोजन हमें बहुत नुकसान पहुंचा रहा है। मोटापा, धूम्रपान, शराब, तनाव, देर से विवाह और चिकित्सीय कारणों जैसे पीसीओएस, बंद ट्यूब और शुक्राणुओं की घटती गुणवत्ता से समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने बताया कि करीब 78 फीसदी दंपति मानसिक तनाव से गुजरते हैं। चौंकाने वाली बात है कि 60 फीसदी महिलाएं पहले झांड़ फूंक, ओझा तांत्रिक के पास जाती हैं। इससे भी समस्या अधिक बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में बाद में आईवीएफ कराने में भी समस्या पैदा हो सकती है।
सीएमई का उद्घाटन सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने किया। विशिष्ट अतिथि रक्षामंत्री के प्रतिनिधि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी दिवाकर त्रिपाठी, आईएफएस के अध्यक्ष कर्नल डॉ. पंकज तलवार रहे। कार्यक्रम में डॉ. सोनिया मलिक, डॉ. केडी नायर, डॉ. पूनम नायर, डॉ. कुलदीप जैन, यूएई से डॉ. यूसुफ अल्हाऊ मौजूद रहे।