सुरक्षा बल कुछ समझते तब तक भारी भीड़ सड़कों पर उतर आई। ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ नारे लगाते हुए लोग प्रदर्शन करने लगे। अंग्रेजों ने आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी शुरू कर दी। सड़कों पर चलते लोग पकड़े जाने लगे।
इसी बीच, उमा नारायण वाजपेयी और छात्र नेता जगदीश नारायण त्रिवेदी कूदकर पार्क के अंदर पहुंच गए और ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ नारे लगाने लगे। डिप्टी एसपी ओंकार सिंह ने पुलिस को वाजपेयी व त्रिवेदी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। इन्हें पकड़ा जा रहा था कि पता नहीं कहां से फेंका गया एक पत्थर आकर ओंकार सिंह के माथे पर लगा और खून निकलने लगा। इसके बाद पूरी व्यवस्था तितर-बितर हो गई और अंग्रेजों की चौकसी धरी रह गई।’